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यत्ते॒ मरी॑चीः प्र॒वतो॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥

English Transliteration

yat te marīcīḥ pravato mano jagāma dūrakam | tat ta ā vartayāmasīha kṣayāya jīvase ||

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Pad Path

यत् । ते॒ । मरी॑चीः । प्र॒ऽवतः॑ । मनः॑ । ज॒गाम॑ । दूर॒कम् । तत् । ते॒ । आ । व॒र्त॒या॒म॒सि॒ । इ॒ह । क्षया॑य । जी॒वसे॑ ॥ १०.५८.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:58» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:6 | Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:6


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ते) हे मानसरोगग्रस्त जन ! तेरा (यत्-मनः) जो मन (प्रवतः-मरीचीः-दूरकं जगाम) प्रगति करती हुई आशा रश्मियों के प्रति दूर तक चला गया है (ते तत्……) पूर्ववत् ॥६॥
Connotation: - मानसिक रोगी का मन आशाओं की तरङ्गों में बहता चला जाये, तो उसको आशारोधक आश्वासनों एवं सान्त्वनापूर्ण आश्वासनों से स्वस्थ करना चाहिए, क्योंकि आशाओं का कोई अन्त नहीं है ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुदूर किरणों में

Word-Meaning: - [१] (यत्) = जो (ते मनः) = तेरा मन (प्रवतः) = अत्यन्त उच्च स्थान में स्थित (मरीची:) = किरणों की ओर (दूरकं जगाम) = दूर-दूर जाता है (ते) = तेरे (तत्) = उस मन को (आवर्तयामसि) = लौटाते हैं जिससे वह (इह क्षयाय) = यहां ही रहे और (जीवसे) = दीर्घ व उत्तम जीवन के लिये हो । [२] यहाँ से सूर्य चौदह करोड़ किलो मीटर के करीब दूरी पर है, अन्य कई नक्षत्र इससे भी हजारों गुणा दूर हैं । इतनी दूरी से आती हुई इन किरणों की ओर हमारा ध्यान जाता है, किरणों के साथ मन भी खूब दूर पहुँच जाता है। उस समय अन्य मनस्कता से होता हुआ कार्य बिगड़ ही जाता है। कार्य की सिद्धि के लिये आवश्यक है कि मन किये जाते हुए कार्य में ही केन्द्रित रहे ।
Connotation: - भावार्थ - मन सुदूर नक्षत्रों से आती हुई किरणों का ध्यान करने लगता है, यह भटकता हुआ मन किसी भी कार्य को सुन्दरता व सफलता से नहीं कर पाता ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ते) हे मानसरोगग्रस्त जन ! तव (यत्-मनः) यन्मनः (प्रवतः-मरीचीः-दूरकं जगाम) प्रगच्छत आशारश्मीन् दूरं गतम् (ते तत्……) पूर्ववत् ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Your mind that wanders far over heavenly heights and radiating rays of light, we bring back to normalcy here for you to be at peace for the good life.