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अ॒हमिन्द्रो॒ न परा॑ जिग्य॒ इद्धनं॒ न मृ॒त्यवेऽव॑ तस्थे॒ कदा॑ च॒न । सोम॒मिन्मा॑ सु॒न्वन्तो॑ याचता॒ वसु॒ न मे॑ पूरवः स॒ख्ये रि॑षाथन ॥

English Transliteration

aham indro na parā jigya id dhanaṁ na mṛtyave va tasthe kadā cana | somam in mā sunvanto yācatā vasu na me pūravaḥ sakhye riṣāthana ||

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Pad Path

अ॒हम् । इन्द्रः॑ । न । परा॑ । जि॒ग्ये॒ । इत् । धन॑म् । न । मृ॒त्यवे॑ । अव॑ । त॒स्थे॒ । कदा॑ । च॒न । सोम॑म् । इत् । मा॒ । सु॒न्वन्तः॑ । या॒च॒त॒ । वसु॑ । न । मे॒ । पू॒र॒वः॒ । स॒ख्ये । रि॒षा॒थ॒न॒ ॥ १०.४८.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:48» Mantra:5 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:5» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:5


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अहम्-इन्द्रः-न-इत्-धनं पराजिग्ये) मैं ऐश्वर्यवान् परमात्मा कभी अध्यात्म धन को नहीं हराता हूँ-उससे रिक्त नहीं होता हूँ (मृत्यवे न कदाचन-अवतस्थे) मृत्यु के लिये भी कभी अवस्थित नहीं होता-मुझे मृत्यु कभी मार नहीं सकता, अतः (सोमम्-इत् सुन्वन्तः) उपासनारस का निष्पादन करते हुए (पूरवः-मा वसु याचत) हे मनुष्यों ! मुझ से धन के लिए प्रार्थना करो (मे सख्ये न रिषाथन) मेरी मित्रता में तुम हिंसित नहीं होते हो ॥५॥
Connotation: - ऐश्वर्यवान् परमात्मा के यहाँ अध्यात्मधन की कमी नहीं होती, क्योंकि वह अमर है, अतः उसका अध्यात्म ऐश्वर्य भी अमर है। उपासनारस समर्पित करनेवाले उस धन की याचना किया करें और उसकी मित्रता के लिये यत्न करें, तो कभी पीड़ित न होवें ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु मित्र, नकि धन मित्र

Word-Meaning: - [१] (अहम्) = मैं (इन्द्र:) = परमैश्वर्यशाली हूँ । (इत्) = निश्चय से (धनम्) = अपने ऐश्वर्य को (न पराजिग्ये) = मैं पराभूत नहीं करवाता। मेरे ऐश्वर्य का कोई पराभव नहीं कर सकता। मैं (कदाचन) = कभी भी (मृत्यवे) = मृत्यु के लिये (न अवतस्थे) = स्थित नहीं होता। सामान्यतः ऐश्वर्य मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है और उसके विनाश का कारण बनता है । परन्तु यह ऐश्वर्य प्रभु के विनाश का कारण नहीं बनता। प्रभु भक्त भी इस धन से निधन की ओर नहीं जाता । [२] हे (पूरवः) = मनुष्यो ! (इत्) = निश्चय से (सोमं सुन्वन्तः) = अपने शरीर में सोम का सम्पादन करते हुए (मा) = मेरे से (वसु) = निवास के लिये आवश्यक धन की (याचता) = याचना करो। निवास के लिये आवश्यक धन ही 'धन' है। वाकी सब तो 'निधन' का कारण बनता है। धन का मित्र बनने की अपेक्षा हम प्रभु के मित्र बनें। हे (पूरवः) = मनुष्यो ! मे (सख्ये) = मेरी मित्रता में (न रिषाथन) = तुम्हारी हिंसा नहीं होती । प्रभु-भक्त वासनाओं से आक्रान्त नहीं होता ।
Connotation: - भावार्थ-धन के पति प्रभु हैं, हम प्रभु से ही जीवन-निर्वाह के लिये पर्याप्त धन की याचना करें। हम धन - मित्र न बनकर प्रभु मित्र बनें ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अहम्-इन्द्रः-न-इत्-धनं पराजिग्ये) अहमैश्वर्यवान् परमात्मा नैवाध्यात्मधनं पराभावयामि न तस्माद्रिक्तो भवामि (मृत्यवे न कदाचन-अवतस्थे) मृत्यवेऽपि कदाचिन्नावस्थितो भवामि नहि मृत्युर्मां मारयति, अतः (सोमम्-इत् सुन्वन्तः) उपासनारस-मुत्पादयन्तः (पूरवः-मा वसु याचत) हे मनुष्याः ! “पूरवः-मनुष्यनाम” [निघ० २।३] मां धनं प्रार्थयध्वम् (मे सख्ये न रिषाथन) मम सखित्वे यूयं न हिंसिता भवथ ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I am Indra, the powerful, never defeated. None can deprive me of my identity. I exist not for death. O makers of soma, ask me for the wealth and peace of life. Men who abide in friendship with me never come to harm.