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न तं रा॑जानावदिते॒ कुत॑श्च॒न नांहो॑ अश्नोति दुरि॒तं नकि॑र्भ॒यम् । यम॑श्विना सुहवा रुद्रवर्तनी पुरोर॒थं कृ॑णु॒थः पत्न्या॑ स॒ह ॥

English Transliteration

na taṁ rājānāv adite kutaś cana nāṁho aśnoti duritaṁ nakir bhayam | yam aśvinā suhavā rudravartanī purorathaṁ kṛṇuthaḥ patnyā saha ||

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Pad Path

न । तम् । रा॒जा॒नौ॒ । अ॒दि॒ते॒ । कुतः॑ । च॒न । न । अंहः॑ । अ॒श्नो॒ति॒ । दुः॒ऽइ॒तम् । नकिः॑ । भ॒यम् । यम् । अ॒श्वि॒ना॒ । सु॒ऽह॒वा॒ । रु॒द्र॒व॒र्त॒नी॒ इति॑ रुद्रऽवर्तनी । पु॒रः॒ऽर॒थम् । कृ॒णु॒थः । पत्न्या॑ । स॒ह ॥ १०.३९.११

Rigveda » Mandal:10» Sukta:39» Mantra:11 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:11


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (राजानौ-अश्विना) हे सर्वत्र राजमान अध्यापक-उपदेशको ! (अदिते) अखण्डनीय (सुहवा) शोभनकल्याणार्थ आमन्त्रण करने योग्य (रुद्रवर्तनी) क्रूर कष्ट को निवृत्त करनेवाले तुम दोनों (न) नहीं (तं कुतः-चन-न-अंहः-अश्नोति) उसको कहीं से भी पाप प्राप्त नहीं होता है (नकिः-दुरितं भयम्) न ही दुःखद भय प्राप्त होता है (यं पत्न्या सह) जिसको पत्नीसहित (पुरोरथं कृणुथः) बहुत जानेवाले गृहस्थ रथवाला बनाते हो ॥११॥
Connotation: - उत्तम अध्यापक और उपदेशक अपने ज्ञान में अखण्डित सर्वत्र बुलाने योग्य-आमन्त्रण करने योग्य कष्ट को निवृत्त करनेवाले जिसे ज्ञान देते हैं, उसे कोई पाप और भय प्राप्त नहीं होता और पत्नी के साथ ऊँचे गृहस्थ रथ पर आरूढ़ होता है ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अंहः - दुरितम् - भयम्

Word-Meaning: - [१] हे (अश्विनो) = प्राणापानो! आप (राजानौ) = [राज् दीप्तौ] शरीर को दीप्त बनानेवाले हो । (अदिते) = [अदीतौ सा० ] इस शरीर को खण्डित न होने देनेवाले हो । (सुहवा) = उत्तमता से आराधना करने के योग्य हो और (रुद्रवर्तनी) = [रुद्र=driving away evil] सब बुराइयों को दूर करनेवाले मार्गवाले हो, आप पहुँचे और बुराई भागी । [२] हे प्राणापाणो! आप (यम्) = जिस भी व्यक्ति को (पल्या सह) = पत्नी के साथ (पुरोरथं कृणुथः) = अग्रगामी रथवाला करते हो, अर्थात् जिसे भी आप उन्नतिपथ पर आगे ले चलते हो (तम्) = उस पुरुष को (कुतश्चन) = कहीं से भी (अंह) = पाप व कष्ट न अनोति = नहीं प्राप्त होता । (न दुरितम्) = न किसी प्रकार का दुराचरण प्राप्त होता है (नकिः भयम्) = और ना ही भय प्राप्त होता है । [३] घर में पति-पत्नी दोनों ही प्राणसाधना करनेवाले हों तो उस घर में उन्नति ही उन्नति होती है। वहाँ पाप दुराचरण व किसी भय के लिये स्थान नहीं होता ।
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना से अंहः = दुरित- भय से सब भाग जाते हैं ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (राजानौ-अश्विना) हे सर्वत्र राजमानौ ! अध्यापकोपदेशकौ ! (अदिते) अखण्डनीयौ (सुहवा) शुभाय कल्याणाय ह्वातव्यौ (रुद्रवर्तनी) रुद्रवर्तनिर्ययोः-रुद्रं क्रूरं कष्टं वर्त्तयतो निवर्त्तयतो यौ तौ युवाम् (न) नहि (तं कुतः-चन न अंहः अश्नोति) तं जनं कुतोऽपि विघ्नो वा पापं वा नैव प्राप्नोति (नकिः-दुरितं भयम्) नैव दुःखदं भयं प्राप्नोति (यं पत्न्या सह) यं खलु पत्न्या सह (पुरोरथं कृणुथः) पुरोगन्तृगृहस्थरथवन्तं कुरुथः ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O brilliant, independent and inviolable twin divine powers, nothing from any where, no sin, no evil, no hate, no fear touches him whom, O Ashvins, easily invoked and approachable, moving by paths free from the pain and suffering of ailments, you join in wedlock and lead forth to a happy home.