Go To Mantra
Viewed 415 times

यो द॒भ्रेभि॒र्हव्यो॒ यश्च॒ भूरि॑भि॒र्यो अ॒भीके॑ वरिवो॒विन्नृ॒षाह्ये॑ । तं वि॑खा॒दे सस्नि॑म॒द्य श्रु॒तं नर॑म॒र्वाञ्च॒मिन्द्र॒मव॑से करामहे ॥

English Transliteration

yo dabhrebhir havyo yaś ca bhūribhir yo abhīke varivovin nṛṣāhye | taṁ vikhāde sasnim adya śrutaṁ naram arvāñcam indram avase karāmahe ||

Mantra Audio
Pad Path

यः । द॒भ्रेभिः । हव्यः॑ । यः । च॒ । भूरि॑ऽभिः । यः । अ॒भीके॑ । व॒रि॒वः॒ऽवित् । नृ॒ऽसह्ये॑ । तम् । वि॒ऽखा॒दे । सस्नि॑म् । अ॒द्य । श्रु॒तम् । नर॑म् । अ॒र्वाञ्च॑म् । इन्द्र॑म् । अव॑से । क॒रा॒म॒हे॒ ॥ १०.३८.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:38» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अभीके) संग्राम में (यः) जो ऐश्वर्यवान् राजा (दभ्रेभिः) थोड़े सैनिकों द्वारा (यः-च भूरिभिः) और जो बहुत सैनिकजनों से (हव्यः) आह्वान करने योग्य-आश्रयणीय है (यः वरिवः-वित्) जो संग्रामसम्बन्धी साधनों को जाननेवाला (नृषह्यः) नरों को स्ववश करनेवाला है, (तं सस्निं श्रुतं नरम्-इन्द्रम्) उस निर्दोष निर्बलतारहित शौर्य में प्रसिद्ध नेता राजा को (विखादे) विविधरूप से खाये जाते नष्ट होते हैं योद्धाजन जिसमें, ऐसे संग्राम में (अद्य) वर्त्तमान संग्रामकाल में (अवसे) रक्षा के लिए (अर्वाञ्चं करामहे) अग्रणायक रूप में वरण करें-बनावें ॥४॥
Connotation: - प्रजाजनों को ऐसा राजा बनाना चाहिए, जो संग्राम के सब साधनों और विजय के प्रकारों को जानता हो। जो बहुत क्या, थोड़े से सेनिकों द्वारा भी विजय करने में समर्थ हो ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'सस्त्रि- श्रुत-नर'

Word-Meaning: - [१] (नृषाह्ये) = वीर पुरुषों से ही सहने योग्य, (विखादे) = कायरों को खा जानेवाले (अभीके) = संग्राम में हम (तम्) = उस (सस्निम्) = उपासकों के जीवनों को पवित्र बनानेवाले (श्रुतम्) = प्रसिद्ध (नरम्) = हमें आगे ले चलनेवाले प्रभु को अद्य आज अवसे रक्षण के लिये (अर्वाञ्चम्) = अपने अभिमुख (करामहे) = करते हैं, अर्थात् उसकी आराधना करते हैं, (यः) = जो (दभ्रेभिः) = अल्पसंख्यावालों से (हव्यः) = पुकारने योग्य होता है (यः च) = और जो (भूरिभिः) = बहुतों से भी पुकारा जाता है और (यः) = जो प्रभु (वरिवोवित्) = सब वरणीय धनों को प्राप्त करानेवाले हैं । [२] संग्राम में सब कोई प्रभु का आराधन करता है। प्रभु के आराधन से ही वह शक्ति प्राप्त होती है जो हमें संग्राम में विजयी बनाती है । यह संग्राम में वीरों के लिये सह्य होता है तो कायरों को तो खा ही जाता है, सो यह 'नृषाह्य व विखाद' है। प्रभु हमारे जीवनों व मनों को पवित्र करते हैं, वे 'सस्त्रि' हैं, यह पवित्रता ही विजय में सहायक होती है ।
Connotation: - भावार्थ - संग्राम में हम प्रभु का स्मरण करें, वे हमें पवित्रता देकर अवश्य विजयी बनायेंगे ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अभीके) सङ्ग्रामे “ अभीके सङ्ग्रामनाम” [निघ० २।१७] (यः) ऐश्वर्यवान् राजा (दभ्रेभिः) अल्पैः सैनिक-जनैः (यः च भूरिभिः) अपि च यो बहुभिः सैनिकजनैश्च (हव्यः) होतव्यः (यः-वरिवः-वित्) सांग्रामिक-साधनवेत्ता (नृषह्यः) नॄन् षोढुमभिभवितुमर्हः (तं सस्निं श्रुतं नरम्-इन्द्रम्) तं निर्दोषं नैर्बल्यरहितं शौर्ये प्रसिद्धं नेतारं राजानम् (विखादे) विविधरूपेण खाद्यन्ते नश्यन्ते जनाः यस्मिन् भयङ्करे संग्रामे (अद्य) प्रवर्तमाने काले (अवसे) रक्षायै (अर्वाञ्चं करामहे) अग्रनायकं सम्पादयामः ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - In the decisive battle of humanity to the point of the destruction of evil and negative forces, we now choose and install that man as Indra, leader for defence, protection and progress, who is adorable equally by the select few and the many, small as well as great, who is clean and pure, reputable and universally rich and powerful to create the space and freedom for thought and action around.