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यो नो॒ दास॒ आर्यो॑ वा पुरुष्टु॒तादे॑व इन्द्र यु॒धये॒ चिके॑तति । अ॒स्माभि॑ष्टे सु॒षहा॑: सन्तु॒ शत्र॑व॒स्त्वया॑ व॒यं तान्व॑नुयाम संग॒मे ॥

English Transliteration

yo no dāsa āryo vā puruṣṭutādeva indra yudhaye ciketati | asmābhiṣ ṭe suṣahāḥ santu śatravas tvayā vayaṁ tān vanuyāma saṁgame ||

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Pad Path

यः । नः॒ । दासः॑ । आर्यः॑ । वा॒ । पु॒रु॒ऽस्तु॒त । अदे॑वः । इ॒न्द्र॒ । यु॒धये॑ । चिके॑तति । अ॒स्माभिः॑ । ते॒ । सु॒ऽसहाः॑ । स॒न्तु॒ । शत्र॑वः । त्वया॑ । व॒यम् । तान् । व॒नु॒या॒म॒ । स॒म्ऽग॒मे ॥ १०.३८.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:38» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:14» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पुरुष्टुत-इन्द्र) हे बहुत प्रशंसनीय राजन् ! (यः) जो (दासः) यज्ञादिकर्मविहीन (आर्यः-अदेवः) सदाचरणसम्पन्न परन्तु नास्तिक (नः-युधये चिकेतति) हमारे प्रति युद्ध करने के लिए संकल्प करता है-सोचता है (अस्माभिः-ते शत्रवः सुसहाः सन्तु) हम सैनिकों के द्वारा वे शत्रुजन सुगमतया सहन करने योग्य अर्थात् पराजित करने योग्य हों (त्वया वयं सङ्गमे तान् वनुयाम) तेरे साथ उन्हें हम संग्राम में हिंसित करने में समर्थ हों ॥३॥
Connotation: - प्रजा को चाहिए कि अपने राजा का सदा साथ दे। जिससे वह राष्ट्र में धर्मकर्म-विहीन और सदाचारसम्पन्न परन्तु नास्तिक, विरुद्ध चिन्तन करनेवाले जनों को दण्ड देने में समर्थ हो ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विजय

Word-Meaning: - [१] हे पुरुष्टुत खूब ही स्तुत होनेवाले (इन्द्र) = सब बल के कार्यों को करनेवाले प्रभो ! (यः) = जो कोई (दासः आर्यो वा) = शूद्र अथवा ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य (अदेवः) = अदिव्य वृत्तिवाला होता हुआ (नः) = हमें (युधये चिकेतति) = युद्ध के लिये जानता है, अर्थात् हमारे साथ युद्ध के लिये उठ खड़ा होता है, (ते शत्रवः) = वे सब शत्रु (अस्माभिः) = हमारे से (सुषहाः सन्तु) = सुगमता से अभिभव करने योग्य हों। हम अपने शत्रुओं को जीत सकें, चाहे वे शत्रु दास हों और चाहे आर्य । यदि उनमें युद्ध की यह अदिव्य वृत्ति जाग उठी है और वे हमारे पर अन्याय से आक्रमण करते हैं, तो हम अपना रक्षणात्मक युद्ध करते हुए उनको पराजित करनेवाले हों । [२] हे प्रभो ! (त्वया) = आपके साथ (वयम्) = हम (तान्) = उनको (संगमे) = युद्ध की टक्कर में वनुयाम जीत सकें। प्रभु की सहायता के बिना विजय सम्भव नहीं होता । प्रभु का स्मरण करना चाहिये, यह स्मरण ही हमें विजयी बनायेगा।
Connotation: - भावार्थ-यदि कोई हमारे पर आक्रमण करे तो रक्षणात्मक युद्ध को करते हुए हम उन शत्रुओं को पराजित करनेवाले हों।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पुरुष्टुत-इन्द्र) हे बहुप्रशंसनीय राजन् ! (यः) यो हि (दासः) यज्ञादिकर्मविहीनो यद्वा (आर्यः-अदेवः) सदाचरणसम्पन्नः परन्तु न देवो यस्य तथाभूतो नास्तिकः (नः-युधये चिकेतति) अस्मान् प्रति युद्धाय युद्धकरणाय सङ्कल्पयति (अस्माभिः ते शत्रवः सुसहाः सन्तु) अस्माभिः सैनिकैः सह ते शत्रवः सुगमतया सोढुं शक्याः पराजेतुं शक्याः सन्तु-सन्ति, तथा (त्वया वयं सङ्गमे तान् वनुयाम) त्वया सह च सङ्ग्रामे “सङ्गमे संग्रामनाम” [ निघ० २।१७] तान् शत्रून् वयं हिंस्म-हन्तुं समर्था भवेम “वनुयाम वनुष्यतः” [ऋ० ८।४०।७] “वनुष्यति हन्तिकर्मा” [निरु० ५।२] ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord most admired and celebrated, Indra, whether it is a power ignoble and slavish in character, or even one dynamic in character but undivine and negative, who challenges us to battle, let those enemies be boldly faced and fought out, and let us all under your leadership, overthrow and destroy them in battle.