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द्यौश्च॑ नः पृथि॒वी च॒ प्रचे॑तस ऋ॒ताव॑री रक्षता॒मंह॑सो रि॒षः । मा दु॑र्वि॒दत्रा॒ निॠ॑तिर्न ईशत॒ तद्दे॒वाना॒मवो॑ अ॒द्या वृ॑णीमहे ॥

English Transliteration

dyauś ca naḥ pṛthivī ca pracetasa ṛtāvarī rakṣatām aṁhaso riṣaḥ | mā durvidatrā nirṛtir na īśata tad devānām avo adyā vṛṇīmahe ||

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Pad Path

द्यौः । च॒ । नः॒ । पृ॒थि॒वी । च॒ । प्रऽचे॑तसा । ऋ॒तव॑री॒ इत्यृ॒तऽव॑री । र॒क्ष॒ता॒म् । अंह॑सः । रि॒षः । मा । दुः॒ऽवि॒दत्रा॑ । न्र्ऽऋ॑तिः । नः॒ । ई॒श॒त॒ । तत् । दे॒वाना॑म् । अवः॑ । अ॒द्य । वृ॒णी॒म॒हे॒ ॥ १०.३६.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:36» Mantra:2 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:9» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (प्रचेतसा-ऋतावरी द्यौः-च पृथिवी च) भली प्रकार चेतानेवाले तथा सत्यज्ञान निमित्तभूत सत्याचरण के जाननेवाले सूर्यलोक पृथ्वीलोक तथा माता पिता (अंहसः-रिषः-रक्षताम्) पाप से हिंसा से रक्षा करें (दुर्विदत्रा निर्ऋतिः-नः-मा-ईशत) बुरी अनुभूति करानेवाली कठिन आपत्ति हमें अपने स्वामित्व में न ले अर्थात् हमारे ऊपर अधिकार न करे (तत्) तिससे (देवानाम्-अवः-अद्य वृणीमहे) सब दिव्य पदार्थों तथा दिव्य गुणों का रक्षण हम इस जन्म में चाहते हैं ॥२॥
Connotation: - संसार में सूर्य और पृथिवी चेतना और जल देनेवाले अन्धकार और पीड़ा से बचानेवाले हैं। इनसे उचित लाभ लेने से घोरापत्ति या अकाल मृत्यु से बच सकते हैं। तथा माता पिता सत्याचरण और ज्ञान का उपदेश देकर चेतानेवाले पाप से बचानेवाले और घोर विपत्ति में काम आनेवाले हैं। इनका हमें रक्षण प्राप्त करना चाहिये ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मस्तिष्क

Word-Meaning: - [१] (द्यौः च पृथिवी च) = द्युलोक और पृथिवीलोक (नः) = हमारे (प्रचेतसे) = प्रकृष्ठ ज्ञान के लिये हों । मस्तिष्करूप द्युलोक का तो ज्ञान प्राप्ति के लिये ठीक होना आवश्यक ही है, शरीररूपी पृथिवी की दृढ़ता भी ज्ञान प्राप्ति के लिये जरूरी है । स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का भी निवास होता है । [२] (ऋतावरी) = ऋत का रक्षण करनेवाले द्युलोक व पृथिवीलोक (अंहसः) = पाप से तथा (रिषः) = रोगादि के कारण होनेवाली हिंसा से (रक्षताम्) = हमें बचाएँ । हमारे मस्तिष्क में ऋत हो, हो । मस्तिष्क में होनेवाला ऋत हमारे विचारों की पवित्रता का कारण बनेगा। पवित्र विचार हमारे आचार को सत् व पवित्र बनाएँगे और इस प्रकार हम पापों से बचे रहेंगे। शरीर में ऋत 'नियमितता = regularity' के रूप में है और यह नियमितता हमें रोगों से होनेवाली हिंसा से बचाती है। समय पर सोने-जागने व खानेवाला व्यक्ति कभी रोगी नहीं होता । [३] इस प्रकार स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ शरीरवाले (नः) = हमारा (दुर्विदत्रा) = दुष्ट धन से उत्पन्न होनेवाली (निर्ऋतिः) = दुर्गति (मा ईशत) = मत शासन करे। हम अन्याय मार्ग से धन कमानेवाले न हों। अन्याय मार्ग से अर्जित धन अन्ततः दुर्गति का कारण बनता है। वस्तुतः अनुचित मार्ग से धन कमाने की ओर उन्हीं का झुकाव होता है जो मस्तिष्क व शरीर के दृष्टिकोण से स्वस्थ नहीं होते । [४] इस प्रकार सुपथ से ही धनार्जन करते हुए हम (अद्या) = आज (देवानाम्) = देवों के (तत् अवः) = उस रक्षण को (वृणीमहे) = वरते हैं। हम अपने अन्दर दिव्यता को धारण करने के लिये यत्नशील होते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सत्य से दीप्त मस्तिष्क हमें पापों से बचाये। नियमित क्रियाओंवाला शरीर रोगों का शिकार न हो। 'हम सुपथ से ही धनार्जन करें' यही स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मस्तिष्क का लक्षण है ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (प्रचेतसा-ऋतावरी द्यौः-च-पृथिवी च) प्रकृष्टं चेतयितारौ तथा सत्यज्ञाननिमित्तभूतौ-सत्याचरणज्ञापयितारौ सूर्यपृथिवीलोकौ तथा मातापितरौ “द्यौर्मे पिता……माता पृथिवी महीयम्” [ऋ० १।१६४।३३] उभौ (अंहसः-रिषः-रक्षताम्) पापाद् हिंसकात् रक्षताम् (दुर्विदत्रा निर्ऋतिः नः-मा ईशत) दुर्विज्ञाना कृच्छ्रापत्तिरस्मान् मा स्वामित्वे नयेत् (तत्) तस्मात् (देवानाम्-अवः-अद्य वृणीमहे) उक्तानां सर्वेषां दिव्यपदार्थानां दिव्यगुणवतां शरीरसम्बन्धिनां पदार्थानां जनानां च रक्षणमस्मिन् जन्मनि याचामहे वाञ्छामः ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The sun and the earth, father and mother, both sources of enlightenment, both committed to divine law and replete with dynamic energy, may, we pray, protect us from sin and violence. Let ignorance, injustice and adversity never dominate our life, let pain and suffering keep off. This is the safety, security and protection of our choice we pray for of the divinities today.