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अ॒न्ये जा॒यां परि॑ मृशन्त्यस्य॒ यस्यागृ॑ध॒द्वेद॑ने वा॒ज्य१॒॑क्षः । पि॒ता मा॒ता भ्रात॑र एनमाहु॒र्न जा॑नीमो॒ नय॑ता ब॒द्धमे॒तम् ॥

English Transliteration

anye jāyām pari mṛśanty asya yasyāgṛdhad vedane vājy akṣaḥ | pitā mātā bhrātara enam āhur na jānīmo nayatā baddham etam ||

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Pad Path

अ॒न्ये । जा॒याम् । परि॑ । मृ॒श॒न्ति॒ । अ॒स्य॒ । यस्य॑ । अगृ॑धत् । वेद॑ने । वा॒जी । अ॒क्षः । पि॒ता । मा॒ता । भ्रात॑रः । ए॒न॒म् । आ॒हुः॒ । न । जा॒नी॒मः॒ । नय॑त । ब॒द्धम् । ए॒तम् ॥ १०.३४.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:34» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:3» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यस्य वाजी-अक्षः-वेदने-अगृधत्) जिस कितव-जुआ खेलनेवाले का द्यूतपाश-जुए का पाशा धन को चाहता है कि धन आये, कहीं से चोरी का भी आये (अस्य जायाम्-अन्ये परि मृशन्ति) इस जुआरी की पत्नी को अन्य जुआरी जन सब ओर से वस्त्र-आभूषणादि पकड़ते हुए दूषित करते हैं (पिता माता भ्रातरः) पिता, माता, भाई लोग (न जानीमः-एनम्-आहुः) इसे हम नहीं जानते, ऐसा कहते हैं (एतं बद्धं नयत) हे जुआरियों या राज्यकर्मचारियों ! इसे बाँधकर ले जाओ ॥४॥
Connotation: - जुए का व्यसन जब किसी को लग जाता है, तो वह कहीं से भी धन मिले, चाहे चोरी से मिले, उसे जुए पर लगा देता है। धन खोकर अपनी पत्नी की दुर्दशा कराता है, माता, पिता, भाई उसका साथ नहीं देते। इस प्रकार दुखी होकर अपने जीवन को समाप्त कर देता है ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पत्नी की भी दुर्गति

Word-Meaning: - [१] यह जुवारी जुए में पत्नी को भी कई बार हार जाता है, तब (अन्ये) = दूसरे विरोधी लोग (अस्य जायाम्) = इसकी पत्नी को (परिमृशन्ति) = वस्त्रकेश अपकर्षण से छूनेवाले होते हैं । [२] यह (वाजी अक्षः) = प्रबल पासा, प्रबल इसलिए कि इसके प्रलोभन को जीतना बड़ा कठिन हो जाता है, (यस्य वेदने) = जिसके धन में (अगृधद्) = लालचवाला होता है, उसकी पूर्वोक्त प्रकार से पत्नी की दुर्गति होती है और पिता माता (भ्रातरः) - पिता, माता व भाई आदि सभी बन्धु उसके विरोधी जुवारियों के प्रति (आहुः) = कहते हैं कि (एनम्) = इसको (न जानीमः) = हम नहीं जानते, हमारा यह कुछ नहीं लगता (एतं बद्धं नयता) = [बेशक ] इसे बाँधकर ले जाओ। हम इसके छुड़ाने के लिये यत्नशील न होंगे।
Connotation: - भावार्थ- जुवारी की पत्नी की भी दुर्गति होती है, इससे कोई सम्बन्ध रखना पसन्द नहीं करता ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यस्य वाजी-अक्षः-वेदने-अगृधत्) यस्य कितवस्य बलवान् द्यूतपाशः द्यूतधननिमित्तमभिकाङ्क्षति यद् धनमागच्छेत् कुतश्चिदपि चौर्यकर्मणापि वा (अस्य जायाम्-अन्ये परिमृशन्ति) अस्य तादृशस्य कितवस्य द्यूतव्यसनिनः पत्नीमन्ये जनाः कितवाः परितः स्पृशन्ति वस्त्राभूषणादिग्रहणाय दूषयन्ति (पिता माता भ्रातरः-न जानीमः-एनम्-आहुः) पित्र्यादय पारिवारिकजना एनं न जानीमहे-इति ते कथयन्ति (एतं बद्धं नयत) हे कितवाः राज्यकर्मचारिणो वा ! एतं बद्धं कृत्वा नयत ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Others covet his wife as a possible prize since the mighty dice have cheated him of his money and all wealth. Father, mother, brother, all disown him and say: off with him, we bound and taken. We know him not.