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यस्य॒ प्रस्वा॑दसो॒ गिर॑ उप॒मश्र॑वसः पि॒तुः । क्षेत्रं॒ न र॒ण्वमू॒चुषे॑ ॥
English Transliteration
Mantra Audio
yasya prasvādaso gira upamaśravasaḥ pituḥ | kṣetraṁ na raṇvam ūcuṣe ||
Pad Path
यस्य॑ । प्रऽस्वा॑दसः । गिरः॑ । उ॒प॒मऽश्र॑वसः । पि॒तुः । क्षेत्र॑म् । न । र॒ण्वम् । ऊ॒चुषे॑ ॥ १०.३३.६
Rigveda » Mandal:10» Sukta:33» Mantra:6
| Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:2» Mantra:1
| Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:6
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (यस्य-उपमश्रवसः पितुः) जिस सर्वोच्च ज्ञानवाले पिता परमात्मा की (गिरः प्रस्वादसः) मन्त्रवाणियाँ प्रकृष्ट आनन्द देनेवाली हैं, उस परमात्मा की (ऊचुषे रण्वं क्षेत्रं न) स्तुति करनेवाले उपासक के लिये रमणीय सर्वसुखप्रद अन्नक्षेत्र की भाँति उसकी शरण है ॥६॥
Connotation: - उच्च ज्ञानश्रवण करानेवाला परमात्मा पिता के समान है, उसकी मन्त्रवाणियाँ बहुत आनन्दरस प्रदान करती हैं। स्तुति करनेवाले के लिये रमणीय शरण प्राप्त होती है ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
मधुर वाणी
Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार प्रभु उसका स्तवन करते हैं (यस्य) = जिसकी (गिरः) = वाणियाँ (प्रस्वादसः) = प्रकृष्ट स्वादवाली हैं। किसकी ? (उपमश्रवसः) = 'उप' समीपता से 'म' मापता है (श्रवः) = ज्ञान को जो उस 'उपमश्रवा' की। प्रभु की उपासना से जो ज्ञान को प्राप्त करता है वह 'उपमश्रवा' कहलाता है । (पितुः) = रक्षक की। यह उपमश्रवाः सदा रक्षणात्मक कार्यों में ही लगता है। इसकी वाणियाँ सदा मधुर होती हैं। यह कभी कड़वी वाणी को नहीं बोलता । [२] इस (ऊचुषे) = मधुर वाणी को बोलनेवाले के लिये (न) = जैसे (क्षेत्रं रण्वम्) = सारा क्षेत्र 'शरीर' ही रमणीय होता है इसी प्रकार इसकी वाणी भी मधुर होती है । वस्तुतः मधुर शब्दों से इसके सारे जीवन में ही माधुर्य आ जाता है। यह मधुर जीवनवाला प्रभु से प्रशंसा को प्राप्त करता है ।
Connotation: - भावार्थ- हम उपासना के द्वारा ज्ञान को प्राप्त करनेवाले बनें, रक्षक हों, हमारी वाणी में माधुर्य हो, सारा शरीर ही रमणीयता को लिये हुवे हो ।
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (यस्य-उपमश्रवसः पितुः) यस्य खलूपरि मानवतः श्रवः श्रवणं वेदश्रवणं यस्मात् तस्य सर्वोत्कृष्टज्ञानवतः सर्वपालकस्य परमात्मनः (गिरः प्रस्वादसः) वाचो मन्त्रवाचः प्रकृष्टानन्ददायिन्यः सन्ति तस्य परमात्मनः शरणम् (ऊचुषे रण्वं क्षेत्रं न) परमात्मनः स्तुतिमुक्तवते-उपासकाय रमणीयं सर्वसुखप्रदान्नवत्क्षेत्रमिवास्ति ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - I celebrate the brilliant ruler whose words of kindness and grace—fatherly protector, exemplary listener and exceptionally rich and honoured as he is— are like a field shower of joyous generosity for the supplicant.
