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प्र मा॑ युयुज्रे प्र॒युजो॒ जना॑नां॒ वहा॑मि स्म पू॒षण॒मन्त॑रेण । विश्वे॑ दे॒वासो॒ अध॒ माम॑रक्षन्दु॒:शासु॒रागा॒दिति॒ घोष॑ आसीत् ॥

English Transliteration

pra mā yuyujre prayujo janānāṁ vahāmi sma pūṣaṇam antareṇa | viśve devāso adha mām arakṣan duḥśāsur āgād iti ghoṣa āsīt ||

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Pad Path

प्र । मा॒ । यु॒यु॒ज्रे॒ । प्र॒ऽयुजः॑ । जना॑नाम् । वहा॑मि । स्म॒ । पू॒षण॑म् । अन्त॑रेण । विश्वे॑ । दे॒वासः॑ । अध॑ । माम् । अ॒र॒क्ष॒न् । दुः॒ऽशासुः॑ । आ । अ॒गा॒त् । इति॑ । घोषः॑ । आ॒सी॒त् ॥ १०.३३.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:33» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:8» Varga:1» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:1


BRAHMAMUNI

इस सूक्त में गर्भदुःख और संसार में मरणत्रास के निवारणार्थ परमात्मा की स्तुति, प्रार्थना, उपासना करनी चाहिये, इस विषय का वर्णन है।

Word-Meaning: - (जनानां प्रयुजः) ज्ञान द्वारा मनुष्यों को प्रेरित करनेवाले विद्वान् (मा प्र युयुज्रे) मुझे ज्ञान देकर प्रेरित करें या करते हैं, ततः (अन्तरेण पूषणं वहामि स्म) अन्तःकरण-मन से पोषण करनेवाले परमात्मा को मैं धारण करता हूँ-मैं अनुभव करता हूँ (अध) पुनः (विश्वे देवासः-माम्-अरक्षन्) मेरे प्राण भी मेरी रक्षा करते हैं (दुःशासुः-आ-अगात्-इति घोषः-आसीत्) दुःख से पीड़ित करनेवाला मृत्यु या कठिन रोग मुझे आ दबाता है, ऐसा प्रत्येक मनुष्य का घोष चिल्लाना पुकारना होता है ॥१॥
Connotation: - विद्वान् गुरुजन ज्ञान देकर मनुष्यों को सत्कर्म में प्रेरित करते हैं तथा परमात्मा की ओर प्रवृत्त करते हैं, जिससे कि वे परमात्मा को आन्तरिक भाव से अनुभव करते हैं। संसार में वे अधिक काल तक जीवन धारण करते हैं, अन्यथा मृत्यु या कठिन रोग के भारी दुःख को भोगते हैं ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

लोकहित के कार्यों में लगे रहना

Word-Meaning: - [१] मा = मुझे जनानां प्रयुजः = लोगों के कार्य [प्रयुज् - जिनमें लगा रहा जाता है] प्रयुयुज्रे प्रकर्षेण कार्य में लगाये रहते हैं । गत मन्त्र के अनुसार लोकहित के लिये दान देनेवाले लोग यही चाहते हैं कि हमें लोकहित के कार्य सदा व्यस्त रखें। हमें नाममात्र भी अवकाश न हो, हमारा सारा समय कार्यों में लगा रहे और मैं अन्तरेण - हृदय मध्य में पूषणं वहामि स्म उस पोषक परमात्मा को धारण करता हूँ । लोकहित के कार्यों में तो लगता हूँ, परन्तु उन सब कार्यों को उस हृदयस्थ प्रभु की शक्ति से ही होता हुआ जानता हूँ, उन कर्मों का मैं किसी प्रकार भी गर्व नहीं करता। सबका पोषण वे प्रभु ही करते हैं, मैंने क्या पोषण करना ? [२] अध= इस प्रकार लोकहित के इन कार्यों का गर्व न करने पर विश्वेदेवासः - सब देव मां अरक्षन्-मुझे सुरक्षित करते हैं। वस्तुतः ये लोकहित के कार्य ही यज्ञ कहलाते हैं, यज्ञों से देववृत्ति का रक्षण होता है । [३] इस प्रकार देवरक्षण प्राप्त होने पर जब कभी अशुभवृत्ति हृदय में उठती हैं तो 'दु:शासुः आगात्'=यह कठिनता से शासन करने योग्य वृत्ति आई इति - इस प्रकार घोष:- अन्दर की वाणी आसीत्-होती है । अन्तःस्थित प्रभु से यह प्रेरणा मिलती है कि यह वृत्ति अशुभ है इससे बचने का पूर्ण प्रयत्न करो ।
Connotation: - भावार्थ- हम लोकहित के कार्यों में लगें, इन कार्यों को प्रभु की ओर से होता हुआ जानें। देवों से होनेवाली रक्षा का पात्र बनें। समय-समय पर प्रभु से दी जानेवाली प्रेरणाओं को सुनें ।

BRAHMAMUNI

अत्र सूक्ते गर्भदुःखस्य संसारे मरणत्रासस्यापवारणाय परमात्मनः स्तुतिप्रार्थनोपासना ज्ञानपूर्विका अनुष्ठेया इति वर्णनम्।

Word-Meaning: - (जनानां प्रयुजः) ज्ञानं प्रदाय मनुष्याणां प्रेरयितारो विद्वांसो गुरवः (मा प्रयुयुज्रे) मां ज्ञानदानेन प्रेरितवन्तः प्रेरयन्ति वा, अत एव (अन्तरेण पूषणं वहामि स्म) अन्तःस्थेन-अन्तःकरणेनाहं पोषयितारं परमात्मानं धारयामि-अनुभवामि (अध) अनन्तरं तस्मादेव (विश्वे देवासः-माम् अरक्षन्) प्राणाः “प्राणा वै विश्वेदेवाः” [तै०५।२।२।१] मां रक्षन्ति (दुःशासुः-आ-अगात्-इति घोषः-आसीत्) दुःखेन यः शसति हिनस्ति स मृत्युः कठिनरोगो वा “शसु हिंसायाम्” [भ्वादि०] ततः-उण् बाहुलकात् स मारको मृत्युः-आगमिष्यति-इति जनघोषोऽस्ति हि ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the divine givers of knowledge and enlightenment to the people inspire and enlighten me too, so I hold the lord giver of life and nourishment dear to my heart in the soul. May the divinities of heaven and earth in nature and humanity protect and promote me. The indomitable is come: this is the declaration.