Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार क्षेत्रविदों से अनुशिष्ट होकर जब मनुष्य ऋजु मार्ग का आक्रमण करने लगा अद्य इत् उ उस ही दिन निश्चय से प्राणीत् इसने प्रकृष्ट जीवन पाया। इससे कुटिल व भोग-प्रधान जीवन कोई जीवन थोड़े ही था ! [२] अब यह इमा अहा- इन दिनों निरन्तर, बिना विच्छेद के अममन्- [ अमन्यत सा० ] मनन करनेवाला हुआ । प्रत्येक कार्य को विचारपूर्वक करनेवाला बना और इस प्रकार अपने 'मनुष्य' [मत्वा कर्माणि सीव्यति], 'विचारपूर्वक करता है' इस नाम को इसने चरितार्थ किया। [३] अपीवृतः - तेज से परिवृत हुए हुए इसने (मातुः) = वेदमाता के (ऊधः) = ज्ञान दुग्ध के स्रोत का (अधयत्) = पान किया। [स्तुता मया वरदा वेदमाता] । 'वेदवाणी को पढ़ना, उसके अन्दर निहित ज्ञान को अपनाना' यह इसका दैनिक कृत्य हो गया। [४] (एनम्) = इस (युवानम्) = दोषों के अभिक्षण व गुणों के मिश्रणवाले युवक को (ईम्) = निश्चय से (जरिमा) = स्तुति (आप) = प्राप्त हुई। यह प्रातः - सायं प्रभु का स्तवन करनेवाला बना । [५] और इस स्तुति का यह परिणाम हुआ कि यह (अहडन्) = घृणा न करनेवाला [हेड् = Hate] सब से प्रेमपूर्वक वर्तनेवाला, (वसुः) = [ वसति, वासयति] स्वयं उत्तम निवासवाला और औरों के उत्तम निवास का कारण बननेवाला, (सुमनाः) = उत्तम मनवाला (बभूव) = हुआ। इस संसार में उत्तम व शान्त मनवाला व्यक्ति वही होता है जो कि 'Live and let live 'जीने और औरों के जीने में सहायक होने के सिद्धान्त को समझ लेता है ।
Connotation: - भावार्थ - उत्तम जीवन यही है कि मनुष्य विचारपूर्वक कर्म करे, स्वाध्यायशील हो, स्तुति करनेवाला, घृणा से परे, सबका वासयिता व सुमना हो ।