Go To Mantra
Viewed 377 times

इ॒यं सा भू॑या उ॒षसा॑मिव॒ क्षा यद्ध॑ क्षु॒मन्त॒: शव॑सा स॒माय॑न् । अ॒स्य स्तु॒तिं ज॑रि॒तुर्भिक्ष॑माणा॒ आ न॑: श॒ग्मास॒ उप॑ यन्तु॒ वाजा॑: ॥

English Transliteration

iyaṁ sā bhūyā uṣasām iva kṣā yad dha kṣumantaḥ śavasā samāyan | asya stutiṁ jaritur bhikṣamāṇā ā naḥ śagmāsa upa yantu vājāḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

इ॒यम् । सा । भू॒याः॒ । उ॒षसा॑म्ऽइव । क्षाः । यत् । ह॒ । क्षु॒ऽमन्तः॑ । शव॑सा । स॒म्ऽआय॑न् । अ॒स्य । स्तु॒तिम् । ज॒रि॒तुः । भिक्ष॑माणाः । आ । नः॒ । श॒ग्मासः॑ । उप॑ । य॒न्तु॒ । वाजाः॑ ॥ १०.३१.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:31» Mantra:5 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:27» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:3» Mantra:5


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इयं सा क्षाः-उषसाम्-इव) यह वह पृथ्वी हमारे समक्ष प्रतिदिन प्रकाशमान उषा के समान फैली रहती है (यत्-ह) जब कि (क्षुमन्तः शवसा समायन्) अन्न देनेवाले और शब्द करनेवाले मेघ वर्षणबल से पृथ्वी पर आते हैं। उसी समय (अस्य जरितुः स्तुतिं भिक्षमाणाः) इस स्तुति करनेवाले के स्तुति-परमात्मा के उपदेश को चाहनेवाले (नः शग्मासः-वाजाः-उप-आ-यन्तु) कल्याणकारी ज्ञानवान् जन हमारे पास आते हैं ॥५॥
Connotation: - परमात्मा की रचित पृथ्वी हमें सदा आधार देनेवाली उषा के समान सहायक है। मेघ अन्न उत्पत्ति के निमित बरसते हैं और परमात्मा के उपदेशवाले हमें उसकी कृपा से प्राप्त होते हैं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शान्तिकर शक्तियाँ

Word-Meaning: - [१] (यद् ह) = जब निश्चय से (क्षुमन्तः) = भूखवाले, अर्थात् जिनकी जाठराग्नि बुझ नहीं गई और जाठराग्नि के ठीक होने के कारण ही (शवसा) = बल व शक्ति के साथ (समायन्) = गतिवाले होते हैं, तब (इयं सा क्षा) = यह वह प्रसिद्ध पृथिवी (उषसां इव) = उषःकालों की तरह (भूयाः) = हो, अर्थात् जिस प्रकार उषः काल के द्वारा अन्धकार का नाश होकर उत्तरोत्तर प्रकाश की वृद्धि होती चलती है, उसी प्रकार हमारे जीवनों में उत्तरोत्तर ज्ञान का प्रकाश बढ़ता चले। इस प्रकार के जीवन को बनाने के लिये यह आवश्यक ही है कि हमारा शरीर का स्वास्थ्य ठीक हो, हम शक्ति सम्पन्न हों और गतिशील क्रियामय जीवनवाले हों। [२] (अस्य) = इस क्रियात्मक जीवन से (जरितुः) = स्तुति करनेवाले की (स्तुतिं भिक्षमाणाः) = स्तुति की प्रार्थना करते हुए, अर्थात् इस प्रकार की स्तुति को सदा कर सकने की कामनावाले (शग्मासः) = अत्यन्त सुख को करनेवाले, 'peace, plenty and power ' वाले (वाजाः) = बल व ज्ञान (नः) = हमें (उपयन्तु) = समीपता से प्राप्त हों, अर्थात् हम शान्तिकर सुखों से युक्त बलों को प्राप्त करें, परन्तु वे बल हमें प्रभु की क्रियात्मक स्तुति से सम्पन्न करनेवाले हों ।
Connotation: - भावार्थ- हमारी जाठराग्नि ठीक हो, शक्ति से युक्त होकर हम क्रियामय जीवनवाले हों । हमारे जीवन में उत्तरोत्तर प्रकाश की अभिवृद्धि हो। हमें सुखकर शक्तियों की प्राप्ति हो और हम प्रभु-स्तवन से कभी दूर न हों ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इयं सा क्षाः उषसाम्-इव) इयं सा पृथिवी प्रतिदिनं प्राप्ताया उषसः प्रकाशमानायाः समाना विकसिता भवति (यत्-ह) यदा खलु (क्षुमन्तः शवसा समायन्) अन्नवन्तः शब्दवन्तश्च मेघा “क्षु-अन्ननाम” [निघ०२।७] “क्षु शब्दे” [अदादि०] क्विपि तुगभावश्छान्दसः, बलेन पूर्णवर्षणेन समागच्छन्ति, तदेवं (अस्य जरितुः स्तुतिं भिक्षमाणाः) अस्य स्तुतिकर्त्तुः स्तुतिं परमात्मोपदेशं याचमानाः (नः शग्मासः-वाजः उप आ यन्तु) अस्माकं कल्याणकराः-ज्ञानवन्तो जनाः-उपागच्छन्ति लडर्थे लोट् ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When clouds laden with power and plenty of rain, and sages with words of enlightenment and power come and bless the earth, then this world of humanity, like the light and freshness of the dawns, shines and prospers on earth, and seekers of wisdom and power asking the sages for knowledge and wisdom of divinity and power and advancement on earth flock here to us, and we pray may power and prosperity continue to flow in for us and our children.