शश से शेर बन जाना [ वासना दहन से पूर्व और पीछे ]
Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र में वासना वन के दहन का उल्लेख था। इस दहन के होने पर (शश:) = एक खरगोश के तुल्य निर्बल व्यक्ति भी इतना शक्तिशाली बन जाता है कि (प्रत्यञ्चम्) = आक्रमण के लिये सामने आनेवाले, (क्षुरम्) = तीक्ष्ण नखदंष्ट्रावाले शेर इत्यादि को भी (जगाम्) = निगल जाता है । खरगोश क्या वह तो शेर से भी अधिक शक्तिशाली बन जाता है। [२] इस वासना वन के दहन पर मैं इतना शक्तिशाली बन जाता हूँ कि (आरात्) = दूर स्थित भी (आद्रिम्) = पर्वत को (लोगेन) = एक मट्टी के ढेले से (व्यभेदम्) = विदीर्ण कर देता हूँ। वासनाक्रान्त व्यक्ति एक मट्टी के ढेले की तरह था तो दग्धवासन पुरुष पर्वत से भी दृढ़ बन जाता है । [३] वासनाओं के नष्ट होने पर (ऋहते) = हस्व - अल्पकाय पुरुष के लिये (बृहन्तं चित्) = अत्यन्त विशालकाय को भी (रन्धयानि) = वशीभूत कर देता हूँ अथवा [rend] विदीर्ण कर देता हूँ। वासना दहन से पहले हमारी स्थिति अल्प थी, इनके दहन को करके हम बड़ों को भी वशीभूत करनेवाले हो जाते हैं। [४] यह दग्धवासन व्यक्ति (शूशुवानः) = निरन्तर अपनी शक्ति को बढ़ाता हुआ (वत्सः) = बछड़े जैसा होता हुआ भी (वृषभम्) = एक शक्तिशाली वृषभ को (वयत्) = आक्रमण के लिये प्राप्त होता है । वत्स होता हुआ वृषभ को जीतनेवाला बनता है ।
Connotation: - भावार्थ- वासना दहन से पूर्व जो शशधा वह दहन के बाद शेर बन जाता है, मट्टी का ढेला, पर्वत बन जाता है, ऋहत् - बृहत् हो जाता है और वत्स वृषभ में परिणत हो जाता है।