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सं यद्वयं॑ यव॒सादो॒ जना॑नाम॒हं य॒वाद॑ उ॒र्वज्रे॑ अ॒न्तः । अत्रा॑ यु॒क्तो॑ऽवसा॒तार॑मिच्छा॒दथो॒ अयु॑क्तं युनजद्वव॒न्वान् ॥

English Transliteration

saṁ yad vayaṁ yavasādo janānām ahaṁ yavāda urvajre antaḥ | atrā yukto vasātāram icchād atho ayuktaṁ yunajad vavanvān ||

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Pad Path

सम् । यत् । वय॑म् । य॒व॒स॒ऽअदः॑ । जना॑नाम् । अ॒हम् । य॒व॒ऽअदः॑ । उ॒रु॒ऽअज्रे॑ । अ॒न्तरिति॑ । अत्र॑ । यु॒क्तः॑ । अ॒व॒ऽसा॒तार॑म् । इ॒च्छा॒त् । अथो॒ इति॑ । अयु॑क्तम् । यु॒न॒ज॒त् । व॒व॒न्वान् ॥ १०.२७.९

Rigveda » Mandal:10» Sukta:27» Mantra:9 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:16» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:9


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (जनानाम्) उत्पन्न हुओं के मध्य में (यत्-वयं यवादः) जिससे कि हम अन्न खानेवाले मनुष्य (यवसादः) घास खानेवाले गौ आदि पशु हैं-उन सबके (उर्वज्रे-अन्तः) महान् प्राप्तिस्थान हृदय में (अहम्-सम्) मैं परमात्मा सम्यक् विराजमान हूँ। (अत्र युक्तः) इस हृदय में युक्त हुआ हूँ (अवसातारम्-इच्छात्) मुझ सहयोगी परमात्मा की उपासक इच्छा करे (अथो) और (ववन्वान्) सङ्ग को चाहता हुआ-चाहने के हेतु (अयुक्तं युनजत्) योग में न लगे अर्थात् अस्थिर मन को युक्त करे ॥९॥
Connotation: - उत्पन्न हुए प्राणियों, अन्न खानेवाले मनुष्यों और घास खानेवाले पशुओं के हृदय में परमात्मा विराजमान है। उस सहयोगी परमात्मा को समागमार्थ चाहे और मनको उसके अन्दर जोड़े-लगावे ॥९॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

योगी का विशाल परिवार

Word-Meaning: - [१] (जनानाम्) = लोगों में (अहम्) = मैं (यवादः) = यव का, जौ का अदन करनेवाला हूँ। यह जौ मेरी मनोवृत्ति को अशुभ से अमिश्रित व शुभ से मिश्रित करता है, इसी से तो इसका नाम ' यव' है 'यु मिश्रणामि श्रणयो:' । [२] इस प्रकार वृत्ति के शुभ होने से (वयम्) = हम उस (अज्रे अन्तः) = इस विशाल वसुधा के प्रांगण में (यद्) = जो (यवसादः) = घास को खानेवाले पशु हैं उनके भी (सम्) = [Together] साथ एक स्थान में एकत्रित हैं, अर्थात् वे भी मेरे परिवार में शामिल हो गये हैं और इस प्रकार मैं 'अहं' न रह कर 'वयं' हो गया हूँ। [३] (अत्रा) = इस प्रकार यहाँ मानव जीवन में (युक्त:) = योगयुक्त हुआ हुआ पुरुष सबके साथ एक हुआ हुआ पुरुष एकत्व का दर्शन करनेवाला पुरुष (अवसातारम्) = जन्म-मरण के चक्र के अन्त के करनेवाले को (इच्छात्) = चाहे । इसकी यह प्रबल कामना हो कि प्रभु मुझे जन्म-मरण चक्र से मुक्त करें। इस मुक्ति के लिये ही युक्त होना आवश्यक है। [४] (अथ उ) = और यह युक्त पुरुष निश्चय से (वन्वान्) = इन्द्रियों व मन का विजय [ वन्= win] करता हुआ (अयुक्तम्) = अयोगयुक्त पुरुष को उपदेश व प्रेरणा के द्वारा (युनजत्) = योग से युक्त करें। योगयुक्त होने से ही मानव का कल्याण सिद्ध होता है । यह योगी अकेला ही योग व समाधि का आनन्द लेने की अपेक्षा अपने विशाल परिवार के अन्य व्यक्तियों को भी योगमार्ग पर जाने के लिये यत्न करता है ।
Connotation: - भावार्थ - योगी वह है जिसने संसार को अपने साथ युक्त किया है। यह सभी को योगी बनाने का यत्न करता है ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (जनानाम्) जन्यमानानां मध्ये (यत्-वयं यवादः) यतो वयमन्नभोक्तारो मनुष्या “यवं दुहन्ता अन्नं दुहन्तौ” [निरु० ६।२६] (यवसादः) घासस्य भोक्तारो गवादयः पशवश्च तेषां सर्वेषां (उर्वज्रे अन्तः) महत्प्रापणस्थाने अन्तः हृदये (अहम् सम्) अहं परमात्मा सम्यग् विराजे (अत्र युक्तः) अत्र हृदये युक्तः सन् (अवसातारम्-इच्छात्) सहयोगभाजिनमुपासक इच्छेत् (अथो) अथ च (ववन्वान्) सम्भजमानः सम्भजनहेतोः (अयुक्तं युनजत्) अयोगिनं योगमनपेक्षमाणं मनो योजयेत् ॥९॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Here in the pasture, in the midst of the vast world of experience and pleasure, we live and enjoy together with all those living beings which enjoy the grass and experience the things they love and find as the result of their karma, and I too among humans enjoy my share of karmic bhoga. Here then, joined to the lord giver of life, experience and ultimate freedom and peaceful abode, let the soul love and meditate on the master, Indra, and may the loving master accept the devotee, earlier separated, now joined.