Word-Meaning: - [१] हे (देव) = हमारे जीवन को प्रकाशित करनेवाले, ज्ञान की ज्योति से दीप्त करनेवाले तथा (पूषन्) = हमारे अंग-प्रत्यंग को शक्ति सेचन से पुष्ट करनेवाले प्रभो ! (वयम्) = हम (अस्माकं मतीनां साधनम्) = हमारी बुद्धियों के सिद्ध करनेवाले, देव के रूप में ज्ञान के द्वारा हमारी मतियों को प्रकाशमय करनेवाले (च) = और (विप्राणाम्) = इन मेधावी पुरुषों के (आधवम्) = सब प्रकार से कम्पित करके मलों के दूर करनेवाले, विप्रों के जीवन को निर्मल बनानेवाले (त्वा) = आपको (मंसीमहि) = हम स्तुत करते हैं । [२] हम प्रभु का स्तवन करते हैं, वे प्रभु हमारे मस्तिष्क को प्रकाशमय व शरीर को पुष्ट करनेवाले हैं। 'देव' होते हुए हमें द्योतित करते हैं और 'पूषन्' के रूप में हमारा पोषण करते हैं। प्रकाश की प्राप्ति के लिये ही हमें उत्तम बुद्धि देते हैं और शक्ति को प्राप्त कराके सब बुराइयों से बचाते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - वे देव हमें ज्ञान की ज्योति देते हैं और वे पूषा हमारे अंगों को पुष्ट करते हैं।