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आ न॑ इन्द्र पृक्षसे॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मोद्य॑तम् । तत्त्वा॑ याचाम॒हेऽव॒: शुष्णं॒ यद्धन्नमा॑नुषम् ॥

English Transliteration

ā na indra pṛkṣase smākam brahmodyatam | tat tvā yācāmahe vaḥ śuṣṇaṁ yad dhann amānuṣam ||

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Pad Path

आ । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । पृ॒क्ष॒से॒ । अ॒स्माक॑म् । ब्रह्म॑ । उत्ऽय॑तम् । तत् । त्वा॒ । या॒चा॒म॒हे॒ । अवः॑ । शुष्ण॑म् । यत् । हन् । अमा॑नुषम् ॥ १०.२२.७

Rigveda » Mandal:10» Sukta:22» Mantra:7 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:7» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:7


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परमात्मन् ! तू (नः-आ पृक्षसे) हमें सब प्रकार से आलिङ्गन करता है, अतः (अस्माकं ब्रह्म-उद्यतम्) हमारे मननीय स्तवन तेरे समर्पित हों (तत्) तिससे (त्वा-अवः शुष्णं याचामहे) तुझ रक्षा करनेवाले बल को हम चाहते हैं (यत्-अमानुषं हन्) जिससे कि तू दैव-बल को प्राप्त है अथवा राक्षस-बल को नष्ट करता है ॥७॥
Connotation: - परमात्मा भलीभाँति हमारे साथ सम्पर्क करता है, इसलिए हमारी स्तुति-स्तवन उसके प्रति होना चाहिए। हम उसके सुखमय रक्षण को चाहते हैं। वह दैव-बल रखता है एवं राक्षसबल को नष्ट करता है ॥७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मनुष्य बनना

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार जब हम इन्द्रियों का निरोध कर पाते हैं तो (इन्द्र) = हे परमैश्वर्यशालिन् प्रभो! आप (नः) = हमारे से (आपृक्षसे) = संपृक्त होते हैं । इन्द्रियों का निरोध करके ही तो (ब्रह्म) = दर्शन का सम्भव होता है। [२] इस सम्पर्क के होने पर (अस्माकम्) = हमारा (ब्रह्म) = ज्ञान (उद्यतम्) = [raised, lifted up] उन्नत होता है। प्रभु के सम्पर्क में आकर हमारा जीवन प्रकाशमय हो उठता है । प्रभु प्रकाश के पुञ्ज हैं, उनके सम्पर्क में आनेवाला अन्धकार में रह ही कैसे सकता है ? [३] इस प्रकाश को प्राप्त करके हम हे प्रभो ! (त्वा) = आप से (तत्) = उस (अवः) = रक्षण व (शुष्णम्) = बल को (याचामहे) = माँगते हैं, (यत्) = जो बल (अमानुषम्) = अमनुष्योचित प्रत्येक बुराई को (हन्) = नष्ट कर देती है। प्रभु से 'प्रकाश, रक्षण व बल' को प्राप्त करके हम सब आसुर भावनाओं को दूर करने व दिव्यभावनाओं को अपनाने में समर्थ होते हैं। हमारे अमानुष भाव दूर होते हैं और हमारे में दिव्य भावों का विकास होता है। 'अमानुष' शब्द क्रूरता व स्वार्थ का संकेत करता है, ये सब क्रूर व स्वार्थमयी भावनायें प्रभु के प्रकाश से नष्ट हो जाती हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु कृपा से हमें वह शत्रु-शोषक बल प्राप्त हो जो कि हमारे सब अमानुष भावों को दूर करके हमें सच्चा मनुष्य बनने की क्षमता प्राप्त कराये ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन् ! त्वम् (नः-आ-पृक्षसे) अस्मान् समन्तात् सम्पर्कयसि-आलिङ्गयसि, अतस्त्वदर्थम् (अस्माकं ब्रह्म-उद्यतम्) अस्माकं मन्त्रं मननीयं स्तवनं समर्पणमस्तु (तत्) तस्मात् (त्वा-अवः शुष्णम् याचामहे) त्वां रक्षाकरं बलं कामयामहे “शुष्णं बलनाम” [निघ० २।९] येन बलेन (यत्-अमानुषं हन्) यतस्त्वं दैवं बलं प्राप्तोऽसि “हन् हिंसागत्योः” [अदादिः] इति गत्यर्थः, यद्वा राक्षसं हंसि ॥७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord omnipotent of cosmic energy and pranic vitality, pray join us and accept our homage of adoration by which we pray of you that great strength and protection of divinity which may repel and destroy inhuman and evil onslaughts of our mortal enemies.