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सू॒र्या॒च॒न्द्र॒मसौ॑ धा॒ता य॑थापू॒र्वम॑कल्पयत् । दिवं॑ च पृथि॒वीं चा॒न्तरि॑क्ष॒मथो॒ स्व॑: ॥

English Transliteration

sūryācandramasau dhātā yathāpūrvam akalpayat | divaṁ ca pṛthivīṁ cāntarikṣam atho svaḥ ||

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Pad Path

सू॒र्या॒च॒न्द्र॒मसौ॑ । धा॒ता । य॒था॒पू॒र्वम् । अ॒क॒ल्प॒य॒त् । दिव॑म् । च॒ । पृ॒थि॒वीम् । च॒ । अ॒न्तरि॑क्षम् । अथो॒ इति॑ । स्वः॑ ॥ १०.१९०.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:190» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:48» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (धाता) धारण करनेवाला परमेश्वर (सूर्याचन्द्रमसौ) सूर्य और चन्द्रमा को (यथापूर्वम्) पूर्वसृष्टि में जैसे रचा था, वैसा ही तथा (दिवं च पृथिवीं च-अन्तरिक्षं च) द्युलोक को, पृथिवीलोक को और अन्तरिक्ष-लोक को (अथ) और (स्वः) इनसे भिन्न लोक को (अकल्पयत्) रचा है-या रचता है ॥३॥
Connotation: - संसार को धारण करनेवाले विधाता परमात्मा ने सूर्य चन्द्रमा द्युलोक पृथिवीलोक अन्तरिक्षलोक और अन्य लोक-लोकान्तरों को पूर्व सृष्टि में जैसे रचा था, वैसे ही इस सृष्टि में रचा है, आगे भी रचता रहेगा ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यथा पूर्व सृष्टि का निर्माण

Word-Meaning: - [१] वह (धाता) = सब सृष्टि का निर्माण करनेवाला प्रभु (सूर्याचन्द्रमसौ) = सूर्य व चाँद को (यथापूर्वम्) = जैसा इससे पूर्व की सृष्टि में बनाया था वैसा ही अकल्पयत् बनाता है। इन सूर्य व चन्द्र से ही दिन व रात्रि के विभाग की कल्पना स्पष्ट होती है । [२] (च) = और वे प्रभु (दिवम्) = द्युलोक को (च) = और (पृथिवीम्) = पृथिवी को, (अन्तरिक्षम्) = अन्तरिक्ष लोक को (अथ उ) = और निश्चय से (स्वः) = प्रकाशमय स्वर्गलोक को यथापूर्व ही बनाते हैं। यथापूर्व बनाने की भावना यही है कि उस सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान् प्रभु से बनाई गयी सृष्टि में कोई न्यूनता नहीं होती, जिसको कि दूर किया जाए। पूर्ण होने से इसमें परिवर्तन की आवश्यकता ही नहीं होती 'पूर्णमदः पूर्णमिदम्' ।
Connotation: - भावार्थ - उस प्रभु द्वारा प्रलयानन्तर यथापूर्व सृष्टि का फिर से निर्माण होता है। यह सूक्त नश्वरता के स्मरण से जीवन को निष्पाप बनानेवाला है। यह पवित्र जीवनवाला व्यक्ति प्रभु का स्मरण करता है और मेल-मिलाप से, अविरोध से चलता है। इसका नाम 'संवनन' हो जाता है, उत्तम उपासक [वन संभक्तौ] व उत्तम विजेता [वन् = win ] । यह प्रभु से प्रार्थना करता है कि-

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (धाता सूर्याचन्द्रमसौ यथापूर्वम्-अकल्पयत्) धारयिता परमेश्वरः सूर्यचन्द्रलोकौ पूर्वकल्पे यथा तथा (दिवं च-पृथिवीं च-अन्तरिक्षम्-अथ स्वः-अकल्पयत्) द्युलोकं पृथिवीम्-अन्तरिक्षं तथाऽन्यलोकलोकान्तरं रचितवान् ॥३॥।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The supreme master creator and controller planned the sun and moon, heaven and earth, the middle regions and the regions of bliss as ever before since eternity.