Go To Mantra
Viewed 1096 times

स॒मु॒द्राद॑र्ण॒वादधि॑ संवत्स॒रो अ॑जायत । अ॒हो॒रा॒त्राणि॑ वि॒दध॒द्विश्व॑स्य मिष॒तो व॒शी ॥

English Transliteration

samudrād arṇavād adhi saṁvatsaro ajāyata | ahorātrāṇi vidadhad viśvasya miṣato vaśī ||

Mantra Audio
Pad Path

स॒मु॒द्रात् । अ॒र्ण॒वात् । अधि॑ । स॒व्वँ॒त्स॒रः । अ॒जा॒य॒त॒ । अ॒हो॒रा॒त्राणि॑ । वि॒ऽदध॑त् । विश्व॑स्य । मि॒ष॒तः । व॒शी ॥ १०.१९०.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:190» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:48» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अर्णवात्) गतिमान् (समुद्रात्-अधि) परमाणुसमुद्र के ऊपर-उसके अनन्तर (संवत्सरः) संसार भर का काल (अजायत) प्रसिद्ध होता है (मिषतः-विश्वस्य) गति करते हुए विश्व-पृथिवी आदि पिण्ड के (अहोरात्राणि) दिन और रातों को-अहर्गणों को किसके कितने हों (विदधत्) यह विधान करता हुआ (वशी) परमात्मा स्वामी होता है ॥२॥
Connotation: - गतिमान् परमाणुसमुद्र के पश्चात् विश्व का काल नियत होता है, फिर गति करते हुए प्रत्येक पिण्ड के दिन-रात परमात्मा नियत करता है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वशी प्रभु द्वारा काल की उत्पत्ति

Word-Meaning: - [१] क्रिया के साथ ही काल का आविर्भाव होता है, वस्तुतः काल में ही प्रत्येक क्रिया हुआ करती है ‘जन्यानां जनकः कालः ' । सो कहते हैं कि (समुद्राद् अर्णवात् अधि) = प्रकृति के अणु समुद्र के गतिवाले होने के साथ ही [अधि-at] (संवत्सरः) = काल (अजायत) = प्रादुर्भूत हुआ । [२] अब वह प्रभु इस काल की मापक इकाई के रूप में (अहोरात्राणि विदधत्) = दिन व रात्रि को बनाता है । वह (मिषतः) = गति करते हुए (विश्वस्य) = सम्पूर्ण अणु समुद्र का (वशी) = वश में करनेवाला होता है। इस वशीभूत अणु समुद्र से ही वह सब पदार्थों को बनायेगा । देते हैं और दिन व रात्रि का भी निर्माण करते
Connotation: - भावार्थ - प्रभु प्रकृति के अणु समुद्र को गति हैं।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अर्णवात् समुद्रात्-अधि) गतिमतः परमाणुसमुद्रादुपरि तदनन्तरम् (संवत्सरः-अजायत) समस्त संसारस्य कालः प्रसिद्धो जातः (मिषतः-विश्वस्य-अहोरात्राणि-विदधत्-वशी) गतिं कुर्वतो विश्वस्य पृथिवीप्रभृतेः पिण्डस्याहोरात्राणि कियन्ती कस्य स्युरिति विधानं कुर्वन् वशी स्वामी भवति ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - From the spatial ocean arose the time parameter of existence, and from there the master creator of the universe with his will created the conceptual days and nights.