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आ नि॑वर्तन वर्तय॒ नि नि॑वर्तन वर्तय । भूम्या॒श्चत॑स्रः प्र॒दिश॒स्ताभ्य॑ एना॒ नि व॑र्तय ॥

English Transliteration

ā nivartana vartaya ni nivartana vartaya | bhūmyāś catasraḥ pradiśas tābhya enā ni vartaya ||

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Pad Path

आ । नि॒ऽव॒र्त॒न॒ । व॒र्त॒य॒ । नि । नि॒ऽव॒र्त॒न॒ । व॒र्त॒य॒ । भूम्याः॑ । चत॑स्रः । प्र॒ऽदिशः॑ । ताभ्यः॑ । ए॒नाः॒ । नि । व॒र्त॒य॒ ॥ १०.१९.८

Rigveda » Mandal:10» Sukta:19» Mantra:8 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:1» Mantra:8 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:8


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (निवर्तन) हे अन्यत्र से हमारी ओर आगमनशील परमात्मा ! (आवर्तय) हमारी ओर प्रवृत्त हो (निवर्तन) हे कदाचित् निवर्तनवाले ! (वर्तय) तू हमें अपनी ओर प्रवृत्त कर (भूम्याः-चतस्रः प्रदिशः) भूमि की जो चारों प्रदिशाएँ हैं, (ताभ्यः एनाः-निवर्तय) उन दिशाओं से इन गौ आदि को यहाँ प्राप्त करा ॥८॥
Connotation: - हे अन्यत्र से हमारी ओर प्राप्त होनेवाले परमात्मन् ! तू हमारे अभिमुख हो, हमें अपनी ओर ले तथा भूमि की चारों दिशाओं से गौ आदियों को हमें प्राप्त करा ॥८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इन्द्रियों का निवर्तन

Word-Meaning: - [१] प्रभु जीव को प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि हे (निवर्तन) = जीवनयात्रा को उत्तमता से करनेवाले जीव ! (आवर्तय) = तू अपनी इन इन्द्रियों को इन भूतों व लोकों और दिशा प्रदिशाओं में प्रवृत्त करनेवाला हो 'परीत्य भूतानि, परीत्य लोकान् परीत्य सर्वाः प्रदिशो दिशश्च' । ये इन्द्रियाँ इनके प्रति जाकर इनको बारीकी से देखें और इनके ज्ञान को प्राप्त करनेवाली हों । [२] हे (निवर्तन) = इस संसार में न उलझनेवाले जीव ! तू (निवर्तय) = इन इन्द्रियों को संसार के इन विविध विषयों से तू निवृत्त करनेवाला हो। ये इन्द्रियाँ उन विषयों के अन्दर उलझ न जायें। [३] (भूम्या:) = इस भूमि को (चतस्रः प्रदिशः) = ये चार विस्तृत दिशायें हैं। (ताभ्यः) = उनसे (एना) = इनको (निवर्तय) = तू निवृत्त करनेवाला हो । विषयों से ये इन्द्रियाँ बद्ध न हो जाएँ, तभी हम जीवन यात्रा को पूर्ण करके अपने ब्रह्मलोकरूप घर में वापिस आ सकेंगे।
Connotation: - भावार्थ - इन्द्रियाँ विषयों के ज्ञान के लिये हैं, उनमें फँस जाने के लिये नहीं। इनको विषय व्यावृत्त सूक्त का प्रारम्भ इस प्रकार हुआ है कि हम इन्द्रियों को विषयासक्त न होने देकर 'शक्ति व शान्ति' के तत्त्वों का धारण करते हुए ज्ञानधन को धारण करें। [१] इन्द्रियों को आत्मवश्य करने का प्रयत्न करें, [२] इन्द्रियों को वश में करके हम गोपति बनें, [३] गोपा यही चाहता है कि इन्द्रियाँ विषयों में जायें परन्तु उनमें फँसे नहीं, [१] यह गोपा ही ब्रह्मलोक में लौटता है, [५] हमारी ये इन्द्रियाँ भोगासक्त होकर मृत न हो जाएँ, [६] अन्न, घृत व दुग्ध के सेवन से ये पुष्ट हों, [७] इनको हम भूमि की सब दिशाओं से लौटायें, [८] ऐसा करने पर ही हमारा मन भद्र की ओर प्रेरित होगा । करना हमारा मौलिक कर्तव्य है ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (निवर्तन) निवर्तनशील अस्मत्प्रत्यागमनशील परमात्मन् ! (आवर्तय) अस्मदभिमुखागमने खल्वावृत्तिं कुरु (निवर्तन) हे कदाचिन्निवर्तनस्वभाव ! (वर्तय) त्वं कदाचित् प्रवृत्तो भव (भूम्याः-चतस्रः प्रदिशः) भूम्याश्चतस्रः प्रदिशो याः सन्ति (ताभ्यः-एनाः-निवर्तय) ताभ्यो दिग्भ्य एता गाः प्रजा इन्द्रियाणि वा-अत्र प्रत्यागमय ॥८॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O constant, vibrant, ever present lord, turn to us. O lord ever vigilant, inspire us to turn to you. Four are the directions of the earth. From all these, let the wealth of the world, the energies of nature, the fluctuations of our mind and senses turn to us, revolve, concentrate and vibrate there and here.