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अ॒न्तश्च॑रति रोच॒नास्य प्रा॒णाद॑पान॒ती । व्य॑ख्यन्महि॒षो दिव॑म् ॥

English Transliteration

antaś carati rocanāsya prāṇād apānatī | vy akhyan mahiṣo divam ||

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Pad Path

अ॒न्तरिति॑ । च॒र॒ति॒ । रो॒च॒ना । अ॒स्य । प्रा॒णात् । अ॒प॒ऽअ॒न॒ती । वि । अ॒ख्य॒त् । म॒हि॒षः । दिव॑म् ॥ १०.१८९.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:189» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:47» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य) इस सूर्य की (रोचना) दीप्ति (प्राणात्) उदय से (अपानती) अस्तमयपर्यन्त जाती हुई (अन्तः-चरति) दोनों उदय और अस्त के मध्य में या-द्युलोक के बीच में फैलती है, (महिषः) महान् सूर्य (दिवं व्यख्यत्) द्युलोक के प्रति प्रसिद्ध होता है ॥२॥
Connotation: - उदय से लेकर अस्तपर्यन्त सूर्य की दीप्ति पृथिवी और द्युलोक के बीच में फैलती है, महान् सूर्य जबकि आकाश में प्रकाशमान होता है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु की रोचना

Word-Meaning: - [१] जिस समय एक मनुष्य साधना को करता हुआ इस कुण्डलिनी का जागरण करता है तो (अस्य अन्तः) = इसके अन्दर (रोचना) = प्रभु की दीप्ति (चरति) = गतिवाली होती है, इसके हृदयदेश में प्रभु की दीप्ति का प्रकाश होता है । यह रोचना (प्राणात्) = इसके अन्दर प्राण शक्ति का संचार करती है और अपानती अपान के द्वारा शोधन रूप कार्य को करती है । [२] इस प्रकार प्राण व अपान के कार्यों के ठीक प्रकार से होने पर यह (महिषः) = प्रभु का पुजारी [मह पूजायाम्] (दिव्यम्) = प्रकाश को (व्यख्यत्) = विशेषरूप से देखता है। इसका हृदय दिव्य प्रकाश से दीप्त हो उठता है।
Connotation: - भावार्थ - योगसाधना से साधक का हृदय प्रभु की दीप्ति से दीप्त हो उठता है । उसकी प्राणापान शक्ति ठीक प्रकार से विकसित होती है ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य रोचना) अस्य सूर्यस्य दीप्तिः (प्राणात्-अपानती) प्राणात्-उदयनात्-अस्तमयं गच्छन्ती (अन्तः-चरति) उभयोरन्तर्मध्ये यद्वा द्यावापृथिव्योर्मध्ये चरति (महिषः-दिवं व्यख्यत्) महान् सूर्यः-द्युलोकं प्रति प्रसिद्धो जातः ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The light of this sun radiates from morning till evening like the prana and apana of the cosmic body illuminating the mighty heaven and filling the space between heaven and earth.