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यो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑ति॒ वृषा॑ शु॒क्रेण॑ शो॒चिषा॑ । स न॑: पर्ष॒दति॒ द्विष॑: ॥

English Transliteration

yo rakṣāṁsi nijūrvati vṛṣā śukreṇa śociṣā | sa naḥ parṣad ati dviṣaḥ ||

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Pad Path

यः । रक्षां॑सि । नि॒ऽजूर्व॑ति । वृषा॑ । शु॒क्रेण॑ । शो॒चिषा॑ । सः । नः॒ । प॒र्ष॒त् । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१८७.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:187» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:45» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:3


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो (वृषा) सुखवर्षक परमेश्वर (शुक्रेण) शुभ्र (शोचिषा) तेज से (रक्षांसि) दुष्ट जनों को (निजूर्वति) नष्ट करता है (स नः०) पूर्ववत् ॥३॥
Connotation: - परमेश्वर सुख को वर्षानेवाला दुष्ट जनों का नाशक है, उसकी स्तुति करनी चाहिए ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दीप्त ज्ञान - ज्योतिवाले प्रभु

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो प्रभु (वृषा) = अत्यन्त शक्तिशाली हैं और (शुक्रेण शोचिषा) = अपनी निर्मल दीप्त ज्ञानज्योति से (रक्षांसि) = सब राक्षसी भावों को (निजूर्वति) = हिंसित करते हैं । (सः) = वे (नः) = हमें (द्विषः) = सब द्वेषभावों से (अतिपर्षत्) = पार ले जायें। [२] प्रभु हमें उस तीव्र ज्ञान - ज्योति को प्राप्त कराते हैं जो कि हमारे सब राक्षसी भावों को दग्ध कर देती है। इस ज्ञान - ज्योति के होने पर द्वेष रह ही कैसे सकता है ?
Connotation: - भावार्थ- प्रभु स्मरण से हमें वह ज्ञान - ज्योति प्राप्त हो जो कि हमारे द्वेष आदि को दग्ध कर दे।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः-वृषा) यः सुखवर्षकः परमेश्वरः (शुक्रेण शोचिषा) शुभ्रेण तेजसा (रक्षांसि निजूर्वति) दुष्टान् जनान् नाशयति “जूर्वति वधकर्मा” [निघ० २।१३] (स नः०) पूर्ववत् ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Who, generous and potent as he is, destroys the evil, wicked, demonic force with his blazing purity and power, may, we pray, eliminate our hate, jealousy and enmities, and wash us clean and immaculate.