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मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः प॑रा॒वत॒ आ ज॑गन्था॒ पर॑स्याः । सृ॒कं सं॒शाय॑ प॒विमि॑न्द्र ति॒ग्मं वि शत्रू॑न्ताळ्हि॒ वि मृधो॑ नुदस्व ॥

English Transliteration

mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ parāvata ā jaganthā parasyāḥ | sṛkaṁ saṁśāya pavim indra tigmaṁ vi śatrūn tāḻhi vi mṛdho nudasva ||

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Pad Path

मृ॒गः । न । भी॒मः । कु॒च॒रः । गि॒रि॒ऽस्थाः । प॒रा॒ऽवतः॑ । आ । ज॒ग॒न्थ॒ । पर॑स्याः । सृ॒कम् । स॒म्ऽशाय॑ । प॒विम् । इ॒न्द्र॒ । ति॒ग्मम् । वि । शत्रू॑न् । ता॒ळ्हि॒ । वि । मृधः॑ । नु॒द॒स्व॒ ॥ १०.१८०.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:180» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:38» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! तू (कुचरः) वक्र गति से चरणशील (गिरिष्ठाः) पर्वतस्थित (मृगः-न) सिंह के समान (भीमः) भयंकर  (परस्याः) परदिशा से (परावतः) दूर देश से (आ जगन्थ) उपयुक्त हुआ आता है (सृकम्) सरणशील (तिग्मं पविम्) तीक्ष्ण वज्र को (संशाय) तीक्ष्ण करके (शत्रून् ताळ्हि) शत्रुओं को ताड़ (मृधः) संग्रामों को (वि नुदस्व) विक्षिप्त कर परास्त कर ॥२॥
Connotation: - राजा को शत्रुओं के लिए पर्वतीय सिंह की भाँति भयंकर होना चाहिये, संग्राम में किसी भी दिशा और किसी भी दूर देश से आकर फैलानेवाले तीक्ष्ण वज्र को शत्रुओं पर फैंके और संग्राम को विजय करना चाहिये ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आत्मनिरीक्षण व वासना विनाश

Word-Meaning: - [१] (मृगः) = [मृग अन्वेषणे] तू आत्मनिरीक्षण करनेवाला हो । (न भीमः) = भयंकर न हो ‘यस्मान्नोद्विजते लोक:' । (कुचरः) = भूमि पर विचरनेवाला हो, आकाश में न उड़, हवाई किले न बना । (गिरिष्ठाः) = सदा ज्ञान की वाणियों में स्थित हो, वेदवाणी के अनुसार अपना जीवन बना। (परस्याः परावतः) = दूर से दूर देश से (आजगन्थ) = तू लौटनेवाला बन । दूर-दूर भटकनेवाले इस मन को तू वशीभूत कर । [२] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (सृकम्) = वज्र को (संशाय) = तेज करके (शत्रून्) = शत्रुओं पर (विताढि) = विशेषरूप से प्रकट कर । 'सृ गतौ' से 'सृकं' शब्द बनता है, उसी प्रकार जैसे कि 'वज गतौ' से 'वज्रं'। गतिशीलता रूप वज्र से ही काम-क्रोध आदि शत्रुओं का पराभव करना होता है । 'पविम्' इस पवित्र करनेवाले गतिशीलता रूप वज्र को (तिग्मम्) = खूब तेज (संशाय) = बनाकर (मृध:) = [murder] मृत्यु की कारणभूत वासनाओं को (विनुदस्व) = परे धकेल दे।
Connotation: - भावार्थ - हम आत्मनिरीक्षण करनेवाले हों, मन को विषयों से व्यावृत्त करें। क्रियाशीलता द्वारा वासनाओं को विनष्ट करें।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! त्वम् (कुचरः गिरिष्ठाः-मृगः-न भीमः) कुत्सितचरो वक्रगत्या चरणशीलः पर्वतस्थायी सिंह इव भयङ्करः (परस्याः परावतः-आजगन्थ) परस्या दिशः दूरदेशादपि खलूपयुक्तः सन् आगच्छसि (सृकं तिग्मं पविं संशाय) सरणशीलं तीक्ष्णं वज्रम् “पविर्वज्रनाम” [निघ० २।२०] तीक्ष्णीकृत्य (शत्रून् ताळ्हि) शत्रून् ताडय (मृधः-वि नुदस्व) संग्रामान् “मृधः संग्रामनाम” [निघ० २।१७] विक्षिप ॥२॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Terrible like a mountain lion roaming around, pray come from the farthest of far off places and, having sharpened the lazer fiery thunderbolt, destroy the enemies and throw out the violent adversaries.