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अ॒भी॒व॒र्तेन॑ ह॒विषा॒ येनेन्द्रो॑ अभिवावृ॒ते । तेना॒स्मान्ब्र॑ह्मणस्पते॒ऽभि रा॒ष्ट्राय॑ वर्तय ॥

English Transliteration

abhīvartena haviṣā yenendro abhivāvṛte | tenāsmān brahmaṇas pate bhi rāṣṭrāya vartaya ||

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Pad Path

अ॒भि॒ऽव॒र्तेन॑ । ह॒विषा॑ । येन॑ । इन्द्रः॑ । अ॒भि॒ऽव॒वृ॒ते । तेन॑ । अ॒स्मान् । ब्र॒ह्म॒णः॒ । प॒ते॒ । अ॒भि । रा॒ष्ट्राय॑ । व॒र्त॒य॒ ॥ १०.१७४.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:174» Mantra:1 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:32» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:1


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BRAHMAMUNI

इस सूक्त में शत्रुनाशार्थ विषययुक्तगन्धकधूमास्त्र प्रयोग करना चाहिए, अपनी प्रजाओं में विरोधी जनों को दण्ड दे, प्रजा के प्रमुख जनों का सहयोग प्राप्त करे, इत्यादि विषय हैं।

Word-Meaning: - (ब्रह्मणस्पते) हे पुरोहित ! (येन-अभीवर्तेन हविषा) जिस शत्रु के प्रति आक्रमण साधन धुँआ देनेवाले विषमिश्रित गन्धक योग से (इन्द्रः) राजा (अभिवावृते) इधर-उधर से समृद्धि को प्राप्त करता है तथा आगे प्रगति करता है (तेन) उसके द्वारा (राष्ट्राय) राष्ट्रहित के लिए (अस्मान्) हमें (अभि वर्तय) समृद्ध कर ॥१॥
Connotation: - पुरोहित को चाहिये कि राजा शत्रु पर आक्रमण कर सके और प्रगति कर सके, उसे गुप्त प्रयोग धूम देनेवाला बताना चाहिये, जो अवसर पर काम आ सके ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अभीवर्त हवि

Word-Meaning: - [१] प्रजा राजा के लिये आय के पञ्चदशांश को सामान्यतः कर के रूप में देती है। इस कर प्राप्त धन से राष्ट्र पर आक्रमण करनेवाले शत्रुओं से देश के रक्षण का सम्भव होता है। इसलिए इस हवि [कर] को भी 'अभीवर्त' नाम दिया गया है। इस (अभीवर्तेन हविषा) = शत्रु पर आक्रमण के सामर्थ्य को देनेवाली हवि से (येन) = जिससे (इन्द्रः) = यह शत्रु विद्रावक राजा अभिवावृते शत्रुओं के प्रति आक्रमण के लिये जाता है, (तेन) = उस हवि से हे (ब्रह्मणस्पते) = ज्ञान के स्वामिन्!(अस्मान्) = हमें (राष्ट्राय) = अपने राष्ट्र की रक्षा के लिये (अभिवर्तय) = शत्रुओं पर आक्रमण करनेवाला बना। [२] राष्ट्र का मुख्य प्रेरणा देनेवाला वेदज्ञ विद्वान् राष्ट्र के सब प्रजावर्ग को शत्रु के मुकाबिले के लिये प्रेरित करे। सब प्रजावर्ग स्वयं उत्साह से राष्ट्रकोश को भरनेवाले हैं, जिससे धनाभाव के कारण आक्रमण में शिथिलता न आ जाये ।
Connotation: - भावार्थ - प्रजा राजा को कर ठीक प्रकार से दे जिससे राजा 'प्रजा रक्षण व शत्रु से आदि अपने सब कर्त्तव्यों का पालन कर सके ।
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BRAHMAMUNI

अस्मिन् सूक्ते शत्रुनाशार्थं विषययुक्तगन्धकधूमास्त्रप्रयोगः कर्तव्यः, स्वप्रजासु विरोधिनो दण्डनीयाः, प्रजाप्रमुखजनानां सहयोगो ग्राह्य इत्येवंविधा विषयाः सन्ति।

Word-Meaning: - (ब्रह्मणस्पते) हे पुरोहित ! (येन-अभीवर्तेन हविषा) येन शत्रुं प्रति खल्वाक्रमणसाधनेन विषमिश्रितगन्धयोगेन धूमप्रदेन (इन्द्रः) राजा (अभिवावृते) अभितः समृद्धिं प्राप्नोति तथाग्रे प्रगच्छति (तेन राष्ट्राय) तेन राष्ट्रहिताय (अस्मान्-अभिवर्तय) अस्मान् समृद्धान् कुरु ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Brahmanaspati, lord of knowledge, governance and statecraft, enlighten us for dedication to the Rashtra, commonwealth of the people, with those means and methods of advancement and victory by which Indra, ruler, advances to planned and time bound goals of progress and victory.