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त्वं त्यमि॑न्द्र॒ सूर्यं॑ प॒श्चा सन्तं॑ पु॒रस्कृ॑धि । दे॒वानां॑ चित्ति॒रो वश॑म् ॥

English Transliteration

tvaṁ tyam indra sūryam paścā santam puras kṛdhi | devānāṁ cit tiro vaśam ||

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Pad Path

त्वम् । त्यम् । इ॒न्द्र॒ । सूर्य॑म् । प॒श्चा । सन्त॑म् । पु॒रः । कृ॒धि॒ । दे॒वाना॑म् । चि॒त् । ति॒रः । वश॑म् ॥ १०.१७१.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:171» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:29» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:4


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र त्वम्) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन् ! तू (पश्चा सन्तम्) पश्चिम दिशा में अस्त हुए सूर्य को (त्यं सूर्यं पुरः-कृधि) उस सूर्य को पुनः प्राप्त पूर्व दिशा में उदित करता है पृथिवी को घुमा करके (देवानां चित्) अग्न्यादि विद्वानों का भी (वशं तिरः) कमनीय तिरोगत छिपे हुए विद्यासूर्य को पुनः आगे करता है ॥४॥
Connotation: - परमात्मा सूर्य को पश्चिम में अस्त करता है सायंकाल के समय और प्रातःकाल पृथिवी को घुमाकर पूर्व दिशा में उदित करता है, इसी प्रकार विद्वानों के कमनीय विद्यासूर्य को ज्ञान प्रदान कराने के लिए जन्म देता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अस्तंगत सूर्य का पुनः उदय

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (त्यम्) = उस (पश्चा सन्तम्) = पश्चिम में अस्त हुए (सूर्यम्) = सूर्य को (पुरः कृधि) = फिर पूर्व में उदित करिये। [२] (देवानाम्) = देवों के देववृत्तिवाले पुरुषों के (चित्) = भी (तिरः) = तिरोहित हुए हुए (वशम्) = कमनीय-कान्त - ज्ञान सूर्य को भी आवरण के विनाश के द्वारा प्रकट करिये ।
Connotation: - भावार्थ- हे प्रभो ! जैसे आप अस्तंगत सूर्य को पुनः उदित करते हैं, इसी प्रकार आप देववृत्तिवाले पुरुषों के ज्ञानसूर्य को भी उदित करिये। सम्पूर्ण सूक्त इस बात का वर्णन करता है कि गतिशील उपासक अपने जीवन को प्रकाशमय बना पाता है। अपने जीवन का सुन्दर परिवर्तन करनेवाला यह 'संवर्त' है, वासनारहित होने से यह शक्तिशाली अंगोंवाला 'आंगिरस' बनता है। यह उषा का ध्यान करता हुआ अपने जीवन को अगले सूक्त में वर्णित प्रकार से साधता है-
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र त्वम्) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन् ! त्वम् (पश्चा सन्तं त्यं सूर्यं पुरः-कृधि) पश्चिमदिशि खल्वस्तंगतं सूर्यं पुनः प्रातः पूर्वस्यां दिशि करोषि पृथिवीं भ्रामयित्वा (देवानां चित्-वशं तिरः) अग्न्यादीनां विदुषां जनानामपि कमनीयं तिरोगतम् विद्यासूर्यं कदाचित् स्थितं पुनः पुरःसरं करोषि ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, let the sun, now gone out of sight in the west, arise upfront in the east, mystery otherwise beyond the reach of the devas, the senses.