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भ॒द्रं वै वरं॑ वृणते भ॒द्रं यु॑ञ्जन्ति॒ दक्षि॑णम् । भ॒द्रं वै॑वस्व॒ते चक्षु॑र्बहु॒त्रा जीव॑तो॒ मन॑: ॥

English Transliteration

bhadraṁ vai varaṁ vṛṇate bhadraṁ yuñjanti dakṣiṇam | bhadraṁ vaivasvate cakṣur bahutrā jīvato manaḥ ||

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Pad Path

भ॒द्रम् । वै । वर॑म् । वृ॒ण॒ते॒ । भ॒द्रम् । यु॒ञ्ज॒न्ति॒ । दक्षि॑णम् । भ॒द्रम् । वै॒व॒स्व॒ते । चक्षुः॑ । ब॒हु॒ऽत्रा । जीव॑तः । मनः॑ ॥ १०.१६४.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:164» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:22» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (भद्रं वरं वै वृणते) कल्याणकर वरणीय वस्तु को ही चाहते हैं (भद्रं दक्षिणं युञ्जन्ति) कल्याणकर शक्ति वैभव को आत्मा में युक्त करते हैं, यह प्रवृत्ति सबकी है (भद्रं वैवस्वते चक्षुः) कल्याणकर दर्शन काल-समय के लिये रखते हैं कि हम चिरजीवित रहें, जीवन के लम्बे समय के लिये दर्शनाकाङ्क्षा रहे (बहुत्र जीवतः-मनः) बहुत अवसरों पर जीवनधारण करनेवाले के समान मेरा मन बना है, बना रहे ॥२॥
Connotation: - मनुष्य को कल्याणकर वस्तु को चाहना, कल्याणकर शक्ति वैभव आत्मा में सात्म्य करना, धारण करना और अपने जीवनकाल के लिए कल्याणकर दर्शन प्रतीक्षारूप में रखना चाहिए, यह जीवित रहनेवाले का मन होना चाहिए ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

भद्र वर वस्तुओं में व्यापृति

Word-Meaning: - [१] सब लोग (वै) = निश्चय से (भद्रम्) = कल्याण व सुख को पैदा करनेवाली (वरम्) = वरणीय श्रेष्ठ बात को ही (वृणते) = वरते हैं, चाहते हैं । सामान्यतः (दक्षिणम्) = इस अत्यन्त कुशल मन को (भद्रं युञ्जन्ति) = शुभ बातों में ही लगाते हैं । [२] (वैवस्वते) = उस ज्ञान के पुञ्ज [विवस्वान् के पुत्र] अन्धकार का विवसन [ दूरीकरण] करनेवाले प्रभु के विषय में (चक्षुः) = व्यापृत आँख (भद्रम्) = मेरा कल्याण व सुख करनेवाली है । अर्थात् मैं सर्वत्र प्रभु की महिमा को देखता हुआ भद्र कार्यों में ही व्यापृत होता हूँ। (जीवतः मनः) = जीवन धारण करनेवाले मेरा मन (बहुत्रा) = अनेक विषयों में है, मुझे अपने नाना कर्त्तव्यों का पालन करना है। सो हे पाप संकल्प ! तू मुझे तो आक्रान्त न कर । मेरे से दूर ही रह ।
Connotation: - भावार्थ- हम वरणीय भद्र वस्तुओं को चाहें । मन को भद्र बातों में लगाये रखें। आँख से सर्वत्र प्रभु की महिमा को देखें । पाप संकल्प से बचने का यही मार्ग है।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (भद्रं वरं वै वृणते) कल्याणकरं वरणीयं वस्तु हि जनाः खलु याचन्ते (भद्रं दक्षिणं युञ्जन्ति) कल्याणकरं शक्तिवैभवमात्मनि युक्तं कुर्वन्ति योजयन्ति-इति प्रवृत्तिर्विदुषां साधारणानां च (भद्रं वैवस्वते चक्षुः) कल्याणकरं दर्शनं कालाय समयाय रक्षन्ति यद् वयं चिरञ्जीवेमेत्याकाङ्क्षन्ति (बहुत्र जीवतः-मनः) बहुषु खल्ववसरेषु जीवनं धारयतो जनस्येव मम मनोऽस्तीति निश्चिनुयात् ॥२॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - People prefer to choose what is good and auspicious. They apply their mind to win the good and blissful. The eye is for the holy vision of the lord of refulgence. My mind is live and awake, alert and versatile.