Go To Mantra

श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानः श॒तं हे॑म॒न्ताञ्छ॒तमु॑ वस॒न्तान् । श॒तमि॑न्द्रा॒ग्नी स॑वि॒ता बृह॒स्पति॑: श॒तायु॑षा ह॒विषे॒मं पुन॑र्दुः ॥

English Transliteration

śataṁ jīva śarado vardhamānaḥ śataṁ hemantāñ chatam u vasantān | śatam indrāgnī savitā bṛhaspatiḥ śatāyuṣā haviṣemam punar duḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

श॒तम् । जी॒व॒ । श॒रदः॑ । वर्ध॑मानः । श॒तम् । हे॒म॒न्तान् । श॒तम् । ऊँ॒ इति॑ । व॒स॒न्तान् । श॒तम् । इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑ । स॒वि॒ता । बृह॒स्पतिः॑ । श॒तऽआ॑युषा । ह॒विषा॑ । इ॒मम् । पुनः॑ । दुः॒ ॥ १०.१६१.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:161» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:19» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:4


Reads 756 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (शतं शरदः-वर्धमानः-जीव) हे रोगी तू सौ शरद् ऋतुओं तक बढ़ता हुआ जीवित रह (शतं हेमन्तान्) सौ हेमन्त ऋतुओं तक बढ़ता हुआ जीता रह (शतम्-उ वसन्तान्) सौ वसन्त ऋतुओं तक जीवित रह (इन्द्राग्नी शतम्) वायु अग्नि सौ वर्ष तक (सविता) सूर्य (बृहस्पतिः) बड़े लोकों का पालक परमात्मा (शतायुषा हविषा) सौ वर्ष आयुवाले हव्यद्रव्य से (इमं पुनः दुः) इस रोगी को देवें, जीवित रखें ॥४॥
Connotation: - शरद् आदि ऋतुएँ, अग्नि, वायु, सूर्य आदि सौ वर्ष की आयु प्रदान करें, ऐसे चिकित्सा करनी चाहिए ॥४॥
Reads 756 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शतशारद जीवन

Word-Meaning: - [१] हे मनुष्य ! तू (वर्धमानः) = सब शक्तियों की दृष्टि से वृद्धि को प्राप्त करता हुआ (शतं शरदः) जीव-सौ शरद् ऋतुओं तक जीनेवाला हो । (शतं हेमन्तान्) = सौ हेमन्त ऋतुओं तक जीनेवाला हो । (उ) = और (शतं वसन्तान्) = सौ वसन्त ऋतुओं तक जीनेवाला हो। [२] (इन्द्राग्नी) = सूर्य और अग्नि तथा (सविता बृहस्पतिः) = उत्पादक वीर्यशक्ति तथा उत्कृष्ट ज्ञान (शतायुषा हविषा) = शतवर्ष के जीवनवाली इस हवि के द्वारा (इमम्) = इस पुरुष को (शतं पुनः दुः) = सौ वर्ष का जीवन फिर से प्राप्त कराते हैं। शरीर में वीर्यशक्ति ही यहाँ 'सविता' कही गई है, यह उत्पादक है । 'बृहस्पति' शब्द ज्ञान का प्रतीक है। ये सब दीर्घजीवन के साधक होते हैं।
Connotation: - भावार्थ - इन्द्र, अग्नि, सविता व बृहस्पति हमें शतशारद जीवन को प्राप्त करायें। 'सूर्य, अग्नि, वीर्यशक्ति व ज्ञान' ये सब दीर्घजीवन के लिये सहायक होते हैं।
Reads 756 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (शतं शरदः जीव वर्धमानः) हे रोगिन् ! त्वं शतं शरदो वर्धमानः सन् जीव (शतं हेमन्तान्-शतम्-उ वसन्तान्) शतं हेमन्तान् तथा शतं हि वसन्तान् वर्धमानः सन् जीव (इन्द्राग्नी शतम्) वायुश्चाग्निश्च त्वां शतं जीवयेताम् (सविता) सूर्यः (बृहस्पतिः) बृहतां पालकः परमात्मा (शतायुषा हविषा-इमं पुनः-दुः) शतायुष्मता हव्यद्रव्येणैनं जनं पुनर्ददतु ॥४॥
Reads 756 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O patient, live a hundred years through autumn, winter and spring seasons, rising, growing and advancing. May Indra, lord of strength, power and glory, Agni, lord of light and fire in the fore front, Savita, lord of life’s generation and sustenance, and Brhaspati, lord of space and radiant knowledge, bless you with hundredfold joy and vest you with hundredfold span of life again with herbs and medications of high order for good health.