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तुभ्यं॑ सु॒तास्तुभ्य॑मु॒ सोत्वा॑स॒स्त्वां गिर॒: श्वात्र्या॒ आ ह्व॑यन्ति । इन्द्रे॒दम॒द्य सव॑नं जुषा॒णो विश्व॑स्य वि॒द्वाँ इ॒ह पा॑हि॒ सोम॑म् ॥

English Transliteration

tubhyaṁ sutās tubhyam u sotvāsas tvāṁ giraḥ śvātryā ā hvayanti | indredam adya savanaṁ juṣāṇo viśvasya vidvām̐ iha pāhi somam ||

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Pad Path

तुभ्य॑म् । सु॒ताः । तुभ्य॑म् । ऊँ॒ इति॑ । सोत्वा॑सः । त्वाम् । गिरः॑ । श्वात्र्याः॑ । आ । ह्व॒य॒न्ति॒ । इन्द्र॑ । इ॒दम् । अ॒द्य । सव॑नम् । जु॒षा॒णः । विश्व॑स्य । वि॒द्वान् । इ॒ह । पा॒हि॒ । सोम॑म् ॥ १०.१६०.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:160» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:18» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! (तुभ्यम्) तेरे लिए (सुताः) उत्पन्न प्रजाजन (तुभ्यम्) तेरे लिए (सोत्वासः) उत्पन्न होनेवाले प्रजाजन शासन करने योग्य और सहायक हैं (त्वाम्) तुझे (गिरः) स्तुतियों से प्रशंसावचनों से (श्वात्र्याः) शीघ्र या पुनः-पुनः आज्ञाकारी (आह्वयन्ति) आमन्त्रित करते हैं (अद्य) इस अवसर पर (इदं सवनम्) इस राष्ट्र को (जुषाणः) सेवन करता हुआ (विश्वस्य) सारे (सोमम्) सम्पन्न राष्ट्र को (विद्वान्) जानता हुआ अपनाता हुआ सुरक्षित रख ॥२॥
Connotation: - राष्ट्र के प्रजाजन उत्पन्न हुए और उत्पन्न होनेवाले राजा के शासन में रहनेवाले और सहायक होते हैं और उन्हें राजा के स्तुतिवचनों द्वारा आमन्त्रण करना चाहिए कि राजा राष्ट्र की भलीभाँति रक्षा करे ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वेदवाणी का आह्वान

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (तुभ्यं सुताः) = तेरे लिये इन सोमों का उत्पादन हुआ है (उ तुभ्यम्) = और तेरे लिये ही (सोत्वासः) = उत्पन्न किये जायेंगे। (ये श्वात्र्याः) = [शु अतन्ति] शीघ्रता से गतिवाली, अर्थात् कर्मों में प्रेरित करनेवाली (गिरः) = वेदवाणियाँ (त्वां आह्वयन्ति) = तुझे पुकारती हैं। तूने इनका अध्ययन करना है और इनमें निर्दिष्ट कर्मों में प्रवृत्त होना है । [२] हे जितेन्द्रिय पुरुष (अद्य) = आज (इदं सवनम्) = इस जीवनयज्ञ को (जुषाण:) = प्रीतिपूर्वक सेवन करता हुआ (विश्वस्य विद्वान्) = अपने सब कर्त्तव्य कर्मों को जानता हुआ (सोमम्) = सोम को [वीर्य को] (इह) = रस शरीर में (पाहि) = सुरक्षित कर । इस सोमरक्षण से ही तू सब कर्त्तव्य कर्मों को पूर्ण कर पायेगा । सोमरक्षण ही तुझे तीव्र बुद्धि बना करके वेद को समझने के योग्य बनायेगा ।
Connotation: - भावार्थ- हम सोम का रक्षण करें, वेदवाणी को पढ़ें। वेदवाणी को समझते हुए हम तदुपदिष्ट कर्त्तव्यों का पालन करें।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! (तुभ्यं सुताः) त्वदर्थमुत्पन्नाः प्रजाजनाः (तुभ्यं सोत्वासः) त्वदर्थमुत्पत्स्यमानाश्च शासनीयाः सहायभूताश्च सन्ति (त्वां गिरः श्वात्र्याः-आह्वयन्ति) त्वां गीर्भिः प्रशंसावचनैः “तृतीयार्थे द्वितीया व्यत्ययेन” क्षिप्रं पुनः पुनर्वाऽऽज्ञाकारिणः आमन्त्रयन्ते (अद्य) अस्मिन्नवसरे (इदं सवनं जुषाणः) इदं राष्ट्रं सेवमानः प्रीयमाणो वा (विश्वस्य सोम विद्वान्) सर्वम् “द्वितीयास्थाने षष्ठी व्यत्ययेन” सम्पन्नराष्ट्रं प्राणिमात्रं रक्ष ॥२॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - To you are these resources dedicated, those that are ripe and ready and those that are being prepared.$Voices of sincere devotion call on you. Indra, knowing well, loving and fully dedicated to this world programme of development, take it on here and now, protect, promote and raise the world to the heights of attainment.