Go To Mantra

अ॒स॒प॒त्ना स॑पत्न॒घ्नी जय॑न्त्यभि॒भूव॑री । आवृ॑क्षम॒न्यासां॒ वर्चो॒ राधो॒ अस्थे॑यसामिव ॥

English Transliteration

asapatnā sapatnaghnī jayanty abhibhūvarī | āvṛkṣam anyāsāṁ varco rādho astheyasām iva ||

Mantra Audio
Pad Path

अ॒स॒प॒त्ना । स॒प॒त्न॒ऽघ्नी । जय॑न्ती । अ॒भि॒ऽभूव॑री । आ । अ॒वृ॒क्ष॒म् । अ॒न्यासा॑म् । वर्चः॑ । राधः॑ । अस्थे॑यसाम्ऽइव ॥ १०.१५९.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:159» Mantra:5 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:5


Reads 475 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सपत्नघ्नी) मैं शत्रुनाशक होती हुई (असपत्ना) शत्रुरहिता हूँ (जयन्ती) जय प्राप्त करती हुई (अभिभूवरी) शत्रु पर अभिभव करनेवाली हूँ (अन्यासाम्-अन्येषाम्-इव) अन्य अस्थिर लताओं के समान विरोधियों के (वर्चः-राधः-अवृक्षम्) तेज धन वैभव को छिन्न-भिन्न करती हूँ ॥५॥
Connotation: - श्रेष्ठ कर्मवती गुणसम्पन्ना कुलवधू कुलदेवी की कोई विरोधी स्त्री नहीं होती, अपितु विरोधी स्त्री के तेज वैभव नष्ट हो जाते हैं, जो उससे विरोध करती है ॥५॥
Reads 475 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सपत्न हनन

Word-Meaning: - [१] (अ - सपत्ना) = मैं रोगरूप सपत्नों से, शत्रुओं से रहित होती हूँ । (सपत्नघ्नी) = इन रोगों व वासनारूप शत्रुओं का हनन करनेवाली बनती हूँ । जयन्ती सदा विजयशील तथा (अभिभूवरी) = वासनारूप शत्रुओं को अभिभूत करनेवाली होती हूँ। [२] इन (अन्यासाम्) = मेरे से भिन्न, मेरी शत्रुभूत वासनाओं के (वर्चः) = तेज को (आवृक्षम्) = मैं काटनेवाली होती हूँ । उसी प्रकार इनके तेज को मैं विनष्ट करती हूँ (इव) = जैसे कि (अस्थेयसाम् राधा) = अस्थिर वृत्तिवालों के ऐश्वर्य को । 'राध:' शब्द का व्यापक अर्थ सफलता है। उस अर्थ को लेने पर भाव यह होगा कि जैसे अस्थिर वृत्तिवालों की सफलता विनष्ट होती है, इसी प्रकार इन वासनाओं की शक्ति को मैं विनष्ट करती हूँ । स्थिर वृत्तिवाली बनकर मैं अपने इस शत्रु संहार रूप कार्य में भी सफलता को प्राप्त करती हूँ ।
Connotation: - भावार्थ - एक आदर्श माता रोग व वासना रूप शत्रुओं को अभिभूत करके, स्थिर वृत्तिवाली बनकर अपने सन्तान निर्माणरूप कार्य में सफल होती है ।
Reads 475 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सपत्नघ्नी-असपत्ना) अहं शत्रुनाशिनी सती शत्रुरहिताऽस्मि (जयन्ती-अभिभूवरी) अत एव जयं प्राप्नुवती तथा शत्रूनभिभवित्री खल्वस्मि (अन्यासाम्-अस्थेयसामिव वर्चः-राधः-आवृक्षम्) अस्थिराणां लतानामिवान्यासां विरोधिनीनां कासां पतिं पातयितुमिच्छन्तीनां तेजो वैभवं च छिनत्ति-इति शक्ताहम् “व्रश्च छेदने” लुङि ऊदित्त्वादिडभावे सम्प्रसारणं च छान्दसम् ॥५॥
Reads 475 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I have no rivals, I throw off the adversaries, I emerge the victor, greater than the challengers, I turn to naught the power and valour of others who are no better than passing gusts of mild winds.