Word-Meaning: - [१] (नः) = हमारी (चक्षुषे) = आँख के लिये (चक्षुः धेहि) = प्रकाशक तेज को धारण कीजिये । (विख्यै) = विशेषरूप से प्रकाशन के लिये और (तनूभ्यः) = हमारे शरीरों की शक्ति के विस्तार के लिये (चक्षुः) = प्रकाशक तेज को धारण करिये। [२] हमें वह दृष्टिशक्ति दीजिये जिससे हम (इदम्) = इस जगत् को (संपश्येम) = समुदित रूप में देख सकें, (च) = और (विपश्येम) = इसके अंगों को अलग-अलग भी अच्छी प्रकार देख सकें। हमारा 'सन्दर्शन व विदर्शन' बड़ा ठीक प्रकार से चले ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रकाशक तेज को प्राप्त करके अपनी आँखों से इस संसार को समष्टि व व्यष्टि के रूप में सम्यक् देखनेवाले हों। हम समाज व व्यक्ति दोनों का ध्यान करनेवाले हों। जहाँ लोकहित में प्रवृत्त हों वहां अपना धारण भी ठीक प्रकार से करें ।