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चक्षु॑र्नो दे॒वः स॑वि॒ता चक्षु॑र्न उ॒त पर्व॑तः । चक्षु॑र्धा॒ता द॑धातु नः ॥

English Transliteration

cakṣur no devaḥ savitā cakṣur na uta parvataḥ | cakṣur dhātā dadhātu naḥ ||

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Pad Path

चक्षुः॑ । नः॒ । दे॒वः । स॒वि॒ता । चक्षुः॑ । नः॒ । उ॒त । पर्व॑तः । चक्षुः॑ । धा॒ता । द॒धा॒तु॒ । नः॒ ॥ १०.१५८.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:158» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:16» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (देवः सविता) प्रेरक सूर्य देव (नः-चक्षुः-दधातु) हमारे लिये दर्शनशक्ति धारण करावे (उत पर्वतः-नः-चक्षुः) हरा पर्वत हमारे लिए दर्शनशक्ति धारण करावे (धाता नः चक्षुः) विधाता परमात्मा हमारे लिये दर्शनशक्ति धारण करावे ॥३॥
Connotation: - दर्शनशक्ति साक्षात् सूर्य से-सूर्य के प्रकाश से मिलती है, परन्तु प्रातःकाल कुछ सूर्य को देखने को मिलती है, हरे पर्वत को देखने से भी नेत्रशक्ति बढ़ा करती है, परमात्मा का ध्यान करने से नेत्रों में बल आता है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

चक्षु

Word-Meaning: - [१] यह (सविता) = सबको कार्यों में प्रवृत्त करनेवाला (देवः) = प्रकाशमय सूर्य (नः) = हमारे लिये (चक्षुः दधातु) = दृष्टिशक्ति का धारण करनेवाला है। सूर्य ही तो वस्तुतः चक्षु के रूप में [आँखों अक्षि गोलको] में रह रहा है । (उत) = और (नः) = हमारे लिये (पर्वत:) = [A tree] वृक्ष (चक्षुः) = दृष्टिशक्ति को दे। वृक्षों की हरियावल आँखों के लिये अत्यन्त हितकर होती है । [२] धाता सबका निर्माण व धारण करनेवाला प्रभु (नः) = हमारे लिये (चक्षु) = दृष्टिशक्ति को (दधातु) = धारित करे । प्रभु के स्मरण से भी दृष्टिशक्ति ठीक बनी रहती है । वस्तुतः प्रभु स्मरण अंग-प्रत्यंग को ठीक रखने के लिये आवश्यक है । अंगरिस् के साथ अथर्ववेद [ब्रह्मवेद] का सम्बन्ध इस बात का संकेत करता है कि हम ब्रह्म का स्मरण करते हैं और सरस अंगोंवाले बनते हैं । [३] जो देवों में सूर्य का स्थान है वही स्थान इन्द्रियों में चक्षु का है। इसका ठीक होना यहाँ सब इन्द्रियों की सशक्तता का प्रतीक है ।
Connotation: - भावार्थ- सूर्य, वृक्ष व धाता हमारी चक्षु की शक्ति को बढ़ानेवाले हों ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (देवः सवितः-नः-चक्षुः दधातु) प्रेरकः सूर्यो देवोऽस्मभ्यं दर्शनशक्तिं धारयतु (उत पर्वतः-नः-चक्षुः) हरितः पर्वतोऽस्मभ्यं दर्शनशक्तिं धारयतु (धाता नः-चक्षुः) विधाता परमात्माऽस्मभ्यं दर्शनशक्तिं धारयतु ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May Savita, generous refulgent sun, give us light of the eye, may the cloud and mountain give us light of the eye, and may Dhata, lord controller and sustainer of life on earth, bless us with light of the eye.