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सूर्यो॑ नो दि॒वस्पा॑तु॒ वातो॑ अ॒न्तरि॑क्षात् । अ॒ग्निर्न॒: पार्थि॑वेभ्यः ॥

English Transliteration

sūryo no divas pātu vāto antarikṣāt | agnir naḥ pārthivebhyaḥ ||

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Pad Path

सूर्यः॑ । नः॒ । दि॒वः । पा॒तु॒ । वातः॑ । अ॒न्तरि॑क्षात् । अ॒ग्निः । नः॒ । पार्थि॑वेभ्यः ॥ १०.१५८.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:158» Mantra:1 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:16» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:1


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BRAHMAMUNI

इस सूक्त में लोकों के प्रमुख देव अग्नि, वायु, सूर्य हैं, इनका ठीक उपयोग करना चाहिए, सूर्य से दर्शनशक्ति का लाभ मिलता है, ये विषय हैं।

Word-Meaning: - (सूर्यः) सूर्य (नः) हमारी (दिवः) द्युलोक से-वहाँ के पदार्थों से (पातु) रक्षा करे (वातः) वायु (अन्तरिक्षात्) अन्तरिक्ष से-वहाँ के पदार्थों से रक्षा करे (अग्निः पार्थिवेभ्यः) अग्नि पृथ्वीस्थ पदार्थों से रक्षा करे, ऐसे वर्त्तना और करना चाहिए ॥१॥
Connotation: - सूर्य, वायु, अग्निलोकों के प्रमुख देव क्रमशः द्युलोक, अन्तरिक्ष-लोक, पृथिवीलोकों के पदार्थ मानव की रक्षा करने के लिये हैं, ऐसा वर्तना और करना चाहिए ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूर्य-वायु-अग्नि

Word-Meaning: - [१] द्युलोक का मुख्य देव 'सूर्य' है, अन्तरिक्ष का 'वायु' और पृथिवी का 'अग्नि' । सो इन से इस रूप में प्रार्थना करते हैं कि (सूर्य:) = सूर्य (नः) = हमें (दिवः पातु) = द्युलोक से रक्षित करे । द्युलोक से हो सकनेवाले उपद्रवों से सूर्य हमें बचाये । अर्थात् द्युलोकस्थ सूर्यादि देवों से किसी प्रकार का हमारा प्रातिकूल्य न हो और इस प्रकार हमारा मस्तिष्क पूर्ण स्वस्थ बना रहे। [२] (वातः) = वायु हमें (अन्तरिक्षात्) = अन्तरिक्ष से रक्षित करे, अन्तरिक्ष से हो सकनेवाले उपद्रवों से वायु हमारा रक्षण करे । अन्तरिक्षस्थ इन वायु आदि देवों से हमारी अनुकूलता हो और इस प्रकार हमारा मन वासनाओं के तूफानों से अशान्त न हो। [३] (अग्निः) = अग्नित्व हमें (पार्थिवेभ्यः) = पृथिवी से सम्भावित उपद्रवों से बचानेवाली हो । अग्नि आदि देवों की अनुकूलता से यह हमारा पार्थिव शरीर स्वस्थ बना रहे ।
Connotation: - भावार्थ- सूर्य की अनुकूलता हमारे मस्तिष्क को ठीक रखे। वायु की अनुकूलता मन को तथा अग्नि की अनुकूलता हमारे शरीर को स्वस्थ रखे ।
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BRAHMAMUNI

अस्मिन् सूक्ते सर्वलोकानां प्रमुखदेवा अग्नवायुसूर्याः सन्ति तेषां यथावद् उपयोगः कार्यः सूर्याद्दर्शनशक्तिः प्राप्यते खल्वित्येवं विषयाः सन्ति।

Word-Meaning: - (सूर्यः-नः-दिवः पातु) सूर्योऽस्मान् द्युलोकात् तत्रत्य-पदार्थाद् रक्षतु (वातः-अन्तरिक्षात्) वायुरस्मान् खल्वन्तरिक्षात् तत्रत्यपदार्थाद् रक्षतु (अग्निः पार्थिवेभ्यः) अग्निः पार्थिवेभ्यः पदार्थेभ्यो रक्षत्विति तथा वर्तितव्यं कर्तव्यं च ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May Surya, the sun, protect and promote us from the regions of light, may Vayu, the winds, protect and promote us from the middle regions of the sky, and may Agni, fire and vital heat, protect and promote us from the earthly regions.