Go To Mantra

य॒ज्ञं च॑ नस्त॒न्वं॑ च प्र॒जां चा॑दि॒त्यैरिन्द्र॑: स॒ह ची॑कॢपाति ॥

English Transliteration

yajñaṁ ca nas tanvaṁ ca prajāṁ cādityair indraḥ saha cīkḷpāti ||

Mantra Audio
Pad Path

य॒ज्ञम् । च॒ । नः॒ । त॒न्व॑म् । च॒ । प्र॒ऽजाम् । च॒ । आ॒दि॒त्यैः । इन्द्रः॑ । स॒ह । ची॒कॢ॒पा॒ति॒ ॥ १०.१५७.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:157» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:15» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


Reads 406 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नः) हमारे (यज्ञं च) श्रेष्ठ कर्म को भी (तन्वं च) शरीर को भी (प्रजां च) पुत्र आदि को भी (इन्द्रः) राजा (आदित्यैः-सह) अखण्डित न्यायाधीशों के साथ (चीक्लृपाति) समर्थ बनावे, सम्पन्न बनावे ॥२॥
Connotation: - राजा न्यायाधीश के सहयोग से राष्ट्र की प्रजाओं के श्रेष्ठ धर्मकृत्यों, शरीरों, उनके पुत्रादि को अन्न और शिक्षा आदि द्वारा योग्य बनावें ॥२॥
Reads 406 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यज्ञ-शरीर-प्रजा

Word-Meaning: - [१] 'अदिति' अविनाशिनी प्रकृति है । इस से उत्पन्न सूर्य आदि सब पिण्ड 'आदित्य' हैं । (इन्द्रः) = वे परमैश्वर्यशाली प्रभु (आदित्यैः सह) = इन अदिति पुत्रों, सूर्य आदियों के साथ (नः) = हमारे (यज्ञम्) = यज्ञ को (च) = और (तन्वम्) = शरीर को (च) = और (प्रजाम्) = प्रजा को (चीक्लृपाति) = समर्थ करते हैं, शक्तिशाली बनाते हैं । [२] जब गत मन्त्र के अनुसार हम शरीर, मन व मस्तिष्क को साधित करते हैं तो प्रभु हमारे अन्दर यज्ञ की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं, हमारे शरीरों को दृढ़ करते हैं तथा हमारी प्रजाओं को भी उत्तम बनाते हैं। मस्तिष्क के वशीकरण से विचारों की उत्तमता होकर यज्ञ प्रवृत्ति बढ़ती है । मन के वशीकरण से वासनाओं के अभाव में शक्ति का रक्षण होकर शरीर उत्तम बनता है। शरीर पर आधिपत्य होने से उत्तम सन्तानों का जन्म होता है ।
Connotation: - भावार्थ- हम मस्तिष्क, मन व शरीर पर संयमवाले होकर अपने में 'यज्ञ, शरीर की शक्ति व प्रजा' का वर्धन करें।
Reads 406 times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नः यज्ञं च तन्वं च प्रजां च) अस्माकं श्रेष्ठतमं कर्म च शरीरं च पुत्रादिप्रजां च (इन्द्रः-आदित्यैः सह चीक्लृपाति) राजा खल्वखण्डितन्यायाधीशैः सह च “आदित्यानाम्-अखण्डित- न्यायाधीशानाम्” [यजु० २५।६ दयानन्दः] कल्पयतु समर्थयतु संसाधयतु ॥२॥
Reads 406 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, the sun, the wind, electric energy of the firmament with all year’s phases of the sun, supports, strengthens and promotes our yajna, our body’s health and our people and future generations.