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अग्ने॑ के॒तुर्वि॒शाम॑सि॒ प्रेष्ठ॒: श्रेष्ठ॑ उपस्थ॒सत् । बोधा॑ स्तो॒त्रे वयो॒ दध॑त् ॥

English Transliteration

agne ketur viśām asi preṣṭhaḥ śreṣṭha upasthasat | bodhā stotre vayo dadhat ||

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Pad Path

अग्ने॑ । के॒तुः । वि॒शाम् । अ॒सि॒ । प्रेष्ठः॑ । श्रेष्ठः॑ । उ॒प॒स्थ॒ऽसत् । बोध॑ । स्तो॒त्रे । वयः॑ । दध॑त् ॥ १०.१५६.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:156» Mantra:5 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:14» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:5


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्रणायक राजन् ! (उपस्थसत्) अपने राज-पद पर स्थित हुआ (विशां प्रेष्ठः-श्रेष्ठः) प्रजाओं का अत्यन्त प्रिय और अत्यन्त प्रशंसनीय तू (केतुः-असि) चेतना देनेवाला है (स्तोत्रे) स्तुति करते हुए राज्यशासन के प्रवक्ता के लिए (वयः) अन्नादि को (दधत्) नियमितरूप से धारण करता हुआ (बोधय) बोध को प्राप्त कर ॥५॥
Connotation: - राजा जब राजपद पर विराजमान हो जावे, तो अपने को प्रजाओं के बीच में या प्रजाओं का अत्यन्त प्रिय तथा अत्यन्त प्रशंसनीय चेतानेवाला बने तथा राष्ट्र के सम्बन्ध में राज्यशासन की जो अच्छी बात कहे, उससे बोध प्राप्त करे उसकी आजीविका का प्रबन्ध करे ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रेष्ठ-श्रेष्ठ

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन्! आप (विशाम्) = सब प्रजाओं के (केतुः) = प्रज्ञान को देनेवाले (असि) = हैं आप ही ज्ञान को प्राप्त करानेवाले हैं। (प्रेष्ठः) = प्रियतम हैं। (श्रेष्ठः) = प्रशस्यतम हैं । (उपस्थसत्) = सबके समीप विद्यमान हैं। [२] (बोधा) = आप ही सबको जानते हैं। सबके रक्षण का आप ही ध्यान करते हैं। (स्तोत्रे) = स्तुतिकर्ता के लिये (वयः) = उत्कृष्ट जीवन को दधत् धारण करते हैं। स्तोता का जीवन, आपके गुणों के धारण से सुन्दर बनता है। |
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ही प्रियतम हैं, प्रशस्यतम हैं। वे ही हमें उत्कृष्ट जीवन प्राप्त कराते हैं । सूक्त का विषय ही है कि प्रभु का अवलम्बन करके हम सब धनों को प्राप्त करते हैं । सब शत्रुओं को पराजित करके उत्कृष्ट जीवनवाले बनते हैं । यह शरीरस्थ तीनों भुवनों को, 'पृथिवीरूप शरीर, अन्तरिक्षरूप हृदय तथा द्युलोकरूप मस्तिष्क' को वशीभूत करने से 'भुवन' कहलाता है [भुवनानि अस्य सन्ति इति] यही प्रभु को प्राप्त करनेवालों में उत्तम होने से 'आप्त्य' है। प्रभु प्राप्ति की साधनावाले होने से 'साधन: ' है तथा लोकहित में प्रवृत्त होने से 'भौवना' कहलाता है। यह यही आराधना करता है कि-
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्रणायक राजन् ! (उपस्थसत्) स्वराजपदे स्थितः सन् (विशां प्रेष्ठः श्रेष्ठः-केतुः-असि) प्रजाजनानां प्रियतमः श्रेष्ठश्च केतयिता-चेतयिताऽसि (स्तोत्रे वयः-दधत्-बोध) स्तुतिं कुर्वते राज्यशासनप्रवक्त्रे वाऽन्नादिकं निर्धारयन् बोधं प्रापय ॥५॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, light and fire of life, you are the essential brilliant definition and identity of humanity, blazing ensign of human culture, dearest, best, closest, freest, bearing food, energy and enlightenment for the celebrant. Pray listen, enlighten, and bless.