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अग्ने॒ नक्ष॑त्रम॒जर॒मा सूर्यं॑ रोहयो दि॒वि । दध॒ज्ज्योति॒र्जने॑भ्यः ॥

English Transliteration

agne nakṣatram ajaram ā sūryaṁ rohayo divi | dadhaj jyotir janebhyaḥ ||

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Pad Path

अग्ने॑ । नक्ष॑त्रम् । अ॒जर॑म् । आ । सूर्य॑म् । रो॒ह॒यः॒ । दि॒वि । दध॑त् । ज्योतिः॑ । जने॑भ्यः ॥ १०.१५६.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:156» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:4


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्रणेतः ! राजन् (जनेभ्यः) प्रजाजनों के लिए (ज्योतिः) जीवनज्योति को (दधत्) धारण करने के हेतु (अजरं नक्षत्रम्) जरारहित अविनाशी अपनी आत्मा को (सूर्यं दिवि रोहय) आकाश में सूर्य की भाँति ऊपर ले जा-उन्नत कर ॥४॥
Connotation: - राजा को चाहिए कि प्रजाजनों में जीवनज्योति भरने के लिए अपने आत्मा को आकाश व सूर्य के समान ऊँचा उठावे-अपने को उन्नत करे ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अजर नक्षत्र

Word-Meaning: - [१] (अग्ने) = हे परमात्मन्! आप (जनेभ्यः) = लोगों के लिये (ज्योतिः दधत्) = प्रकाश को प्राप्त करने के हेतु से (दिवि) = द्युलोक में (सूर्यम्) = सूर्य को (आरोहयः) = आरूढ़ करते हैं, जो सूर्य (अजरं नक्षत्रम्) = न जीर्ण होनेवाला नक्षत्र है । [२] 'सूर्य कभी जीर्ण होकर समाप्त हो जाएगा' ऐसी बात नहीं है। प्रभु का प्रत्येक रचना चाक्रिक क्रम से गति करती हुई सदा पूर्ण बनी रहती है। नदियों का जल बहता चला जा रहा है। समुद्र में पहुँचकर यह वाष्पीभूत होकर, मेघ बनकर फिर पर्वत- शिखरों पर वृष्टि के रूप में बरसता है। और फिर वहाँ से प्रवाहित होकर नदियों को सदा परिपूर्ण किये रहता है। इसी प्रकार सूर्य के प्रकाश की बात है। सूर्य कभी समाप्त न हो जाएगा। 'नक्षत्र' शब्द इसी भावना को व्यक्त कर रहा है, 'नभीयते त्रायते' अक्षीण होता हुआ यह सदा रक्षण कार्य में लगा रहता है। इस अजर नक्षत्र के द्वारा प्रभु हम सब में प्राणशक्ति का संचार करते हैं और प्रकाश को प्राप्त कराते हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ने सूर्य की स्थापना के द्वारा हमारे जीवन को ज्योतिर्मय बनाने की व्यवस्था की है।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्रणेतः ! राजन् ! (जनेभ्यः-ज्योतिः-दधत्) प्रजाजनेभ्यो जीवनज्योतिर्धारयन्-धारयितुम् (अजरं नक्षत्रम्) जरारहितमविनाशिनम् “नक्षत्रः यो न क्षीयते सः” [ऋ० ६।६७।६ दयानन्दः] स्वात्मानम् (सूर्यं दिवि रोहय) आकाशे सूर्यमिवोपरि नय-उन्नय ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, light of life, ruler of existence, let the unaging sun, star of good fortune, rise high in heaven so that it may bring light and energy for humanity and enhance their well being.