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अपे॑न्द्र द्विष॒तो मनोऽप॒ जिज्या॑सतो व॒धम् । वि म॒न्योः शर्म॑ यच्छ॒ वरी॑यो यवया व॒धम् ॥

English Transliteration

apendra dviṣato mano pa jijyāsato vadham | vi manyoḥ śarma yaccha varīyo yavayā vadham ||

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Pad Path

अप॑ । इ॒न्द्र॒ । द्वि॒ष॒तः । मनः॑ । अप॑ । जिज्या॑सतः । व॒धम् । वि । म॒न्योः । शर्म॑ । य॒च्छ॒ । वरी॑यः । य॒व॒य॒ । व॒धम् ॥ १०.१५२.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:152» Mantra:5 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:10» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:5


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! (द्विषतः) शत्रु के (मनः) मन को (अप) अपगत कर-अस्त-व्यस्त कर-भ्रान्त कर (जिज्यासतः) हमारी वयोहानि को चाहनेवाले के (वधम्) वधक शस्त्रप्रहार को (अप) नष्ट-भ्रष्ट कर (मन्योः) मन्युवाले या अभिमानी शत्रु के (वरीयः शर्म) बहुत सुखविशेष को (वि यच्छ) विशेषरूप से दे (वधं यवय) उसके वधक प्रहार को दूर कर-पृथक् कर ॥५॥
Connotation: - राजा शत्रु के मन को भ्रान्त करे और वयोहानि चाहते हुए के वधकसाधन को भी नष्ट-भ्रष्ट और अस्त-व्यस्त करे, क्रोधी और अभिमानी शत्रु के सुख-साधन को प्रजा में बाँट देना चाहिये ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अद्वेष- अक्रोध

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमात्मन् ! (द्विषतः) = हमें प्रीति न करनेवाले द्वेषी पुरुष के (मनः) = मन को (अप) [यवया] = हमारे से पृथक् करिये। उसका द्वेष हमारे तक न पहुँचे । (जिज्यासत:) = हमारी वयोहानि को चाहते हुए पुरुष के (वधम्) = हनन साधन आयुधों को (अप) = हमारे से दूर करिये। [२] (मन्योः) = क्रोध से (वि) = हमें पृथक् रखिये। हम कभी क्रोधाभिभूत न हों। इस पर क्रोध से दूर करके (वरीयः) = उरुतर, अत्यन्त विशाल (शर्म) = सुख को (यच्छ) = हमें प्राप्त कराइये । (वधम्) = हननसाधन आयुधों को (यवया) = हमारे से पृथक् करिये। शत्रुओं के अस्त्र हमारे पर न गिरें ।
Connotation: - भावार्थ - हम द्वेष करनेवालों व आयुष्य की हानि करनेवालों से बच सकें। क्रोध से दूर होकर उत्कृष्ट सुख का अनुभव करें। सम्पूर्ण सूक्त अन्त: व बाह्य शत्रुओं के विजय की प्रेरणा दे रहा है। इन अन्तः व बाह्य शत्रुओं को जीतने की प्रेरणा माताओं ने ही देनी होती है। वे बालकों को लोरियों में ही इस प्रकार की प्रेरणायें देकर अपने बच्चों को देव बनाती हैं, सो 'देवजामयः' कहलाती हैं। इन्होंने बच्चों को इन्द्रियों का शासक 'इन्द्र' बनाता है, सो ये 'इन्द्रमातरः ' है । ये 'देवजामयः इन्द्रमातरः ' ही अगले सूक्त की ऋषिका है-

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) राजन् ! (द्विषतः-मनः-अप) द्वेष्टुः शत्रोर्मनोऽपगमय भ्रान्तं कुरु (जिज्यासतः वधम्-अप) अस्माकं वयोहानिमिच्छतो जनस्य वधकप्रहारमपगमय (मन्योः-शर्म वरीयः-वि यच्छ) मन्युमतो-ऽभिमानिनो-उरुतरं शर्म सुखं विशेषेण देहि (वधं यवय) तस्य वधं-प्रहारमतिदूरं पृथक्कुरु ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, beat off and eliminate the mind and intention of the jealous, blunt off the weapon of the powers that wish to destroy. Let anger be calmed down, give us peace and comfort of higher order, and remove the killer death.