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उ॒त गाव॑ इवादन्त्यु॒त वेश्मे॑व दृश्यते । उ॒तो अ॑रण्या॒निः सा॒यं श॑क॒टीरि॑व सर्जति ॥

English Transliteration

uta gāva ivādanty uta veśmeva dṛśyate | uto araṇyāniḥ sāyaṁ śakaṭīr iva sarjati ||

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Pad Path

उ॒त । गावः॑ऽइव । अ॒द॒न्ति॒ । उ॒त । वेश्म॑ऽइव दृ॒श्य॒ते॒ । उ॒तो इति॑ । अ॒र॒ण्या॒निः । सा॒यम् । श॒क॒टीःऽइ॑व । स॒र्ज॒ति॒ ॥ १०.१४६.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:146» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (उत) और (गावः-इव-अदन्ति) गौवें जैसे अरण्यपशु गवय-नीलगाय घास-आदि खाते हैं (उत) और (वेश्म-इव दृश्यते) कहीं पर घर जैसा गुल्म आदि का वितान-घेरा बना हुआ दिखाई देता है (उत) और सायङ्काल के समय (अरण्यानिः) अरण्यानी (शकटीः-इव) गाड़ियों जैसी को (सर्जति) वायु के प्रचलन से चलाती हुई सी दिखलाई देती है ॥३॥
Connotation: - अरण्यों के समूह अरण्यानी का यह भी एक दृश्य है, उनमें नीलगाय आदि वन्य पशु घास खाते हुए विचरते हैं और वहीं पर गुल्म तरु आदियों से छाया हुआ घर जैसा दिखलाई पड़ता है और सायंकाल के समय तीव्र वायु के झोंके लगते हैं, जैसे गाड़ियाँ चलती हों ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सादगी व शून्यावस्था का अभ्यास

Word-Meaning: - [१] (उत) = और (गावः इव) = गौवों की तरह (अदन्ति) = वनस्थ पुरुष खाते हैं। ये ग्राम्य भोजनों को छोड़कर वन के फल-मूलादिकों को ही खानेवाले बनते हैं । यथासम्भव अग्निपक्व आहार का यह त्याग कर देते हैं । [२] (उत) = और इन्हें यह वन ही (वेश्म इव) = घर की तरह (दृश्यते) = दिखता है । यह कुटिया को ही महल समझते हैं । (उत उ) = और निश्चय से (अरण्यानि:) = यह वनस्थ पुरुष (सायम्) = सायंकाल (शकटीः इव) = गाड़ियों की तरह (सर्जति) = सब हृदयस्थ भावों को विसृष्ट करता है। जैसे वन से सब लकड़ी आदि को लेने के लिये आयी हुई गाड़ियाँ लौट जाती हैं, इसी प्रकार यह वनस्थ पुरुष दिन की समाप्ति पर सब भावों को दूर करके शून्यावस्था को लाने का अभ्यास करता है। संसार से उपरत होने का प्रतिदिन अभ्यास करता हुआ यह प्रभु के अधिक समीप होता चलता है।
Connotation: - भावार्थ- वनस्थ पुरुष का खान-पान रहनसहन अधिक से अधिक प्रकृति के समीप होता है । यह प्रतिदिन शून्यावस्था को प्राप्त करने का अभ्यास करता है ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (उत) अपि च (गावः-इव-अदन्ति) गाव इवारण्यपशवो गवयाः खलु घासादिकं भक्षयन्ति (उत) अपि च (वेश्म-इव दृश्यते) क्वचित् गृहमिव गुल्मादिवितानो दृश्यते (उत) अपि च (सायम्) सायंकाले (अरण्यानिः-शकटीः-इव सर्जति) वायुप्रचलनादरण्यानी शकटीर्यानानि विसृजति चालयति-इव दृश्यते ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Forest animals graze like cows, clusters of flowers give a homely look, and the forest spirit appears to say good bye to the carts that leave for village homes.