Word-Meaning: - [१] (यम्) = जिस सोम को (सुपर्ण:) = उत्तमता से अपना पालन व पूरण करनेवाला, (श्येनस्य पुत्रः) = [श्यैङ्गतौ] गतिशील का पुत्र, अर्थात् खूब क्रियाशील जीवनवाला व्यक्ति (परावतः) = सुदूर देश से (आभरत्) = शरीर में चारों ओर धारण करता है। यह सोम अन्न में निवास करता है। उस अन्न को जब हम खाते हैं, तो पहले रस उत्पन्न होता है। रस से रुधिर, रुधिर से मांस, मांस से मेदस्, मेदस् से अस्थि, अस्थि से मज्जा तथा मज्जा से इस वीर्य शक्ति की उत्पत्ति होती है । एवं सुदूर देश से सातवीं मंजिल में इसका लाभ होता है। [२] यह सोम सुरक्षित होने पर (शतचक्रम्) = सौ वर्ष के आयुष्य को करनेवाला है तथा यह वह है (यः) = जो कि (अह्यः) = [अहे:- आहन्तुः-सर्पस्य= कुटिलताया] कुटिलता का (वर्जनिः) = मुख मोड़ देनेवाला है, अर्थात् कुटिलता की वृत्ति को हमारे से दूर करनेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम का रक्षण क्रियाशील पुरुष ही कर पाता है। सुरक्षित सोम सौ वर्ष के 'आयुष्य को देनेवाला व कुटिल वृत्ति को दूर करनेवाला है ।