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इ॒न्द्र॒वा॒यू बृह॒स्पतिं॑ सु॒हवे॒ह ह॑वामहे । यथा॑ न॒: सर्व॒ इज्जन॒: संग॑त्यां सु॒मना॒ अस॑त् ॥

English Transliteration

indravāyū bṛhaspatiṁ suhaveha havāmahe | yathā naḥ sarva ij janaḥ saṁgatyāṁ sumanā asat ||

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Pad Path

इ॒न्द्र॒वा॒यू इति॑ । बृह॒स्पति॑म् । सु॒ऽहवा॑ । इ॒ह । ह॒वा॒म॒हे॒ । यथा॑ । नः॒ । सर्वः॑ । इत् । जनः॑ । सम्ऽग॑त्याम् । सु॒ऽमनाः॑ । अस॑त् ॥ १०.१४१.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:141» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:29» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सुहवा-इन्द्रवायू) उत्तम आह्वान करने योग्य सभाध्यक्ष और सेनाध्यक्ष को (बृहस्पतिम्) बहुतों का पालन करनेवाले वैश्य को (हवामहे) हम आमन्त्रित करते हैं, (यथा नः) जिससे कि हमारे (सर्वः-इत्-जनः) हमारा सब जनसमूह (सङ्गत्याम्) परस्पर सङ्गति में (सुमनाः) प्रसन्नमन (असत्) हो जावे ॥४॥
Connotation: - प्रजाजन सभाध्यक्ष और सेनाध्यक्षों को तथा प्रजा के पालक वैश्य को आमन्त्रित करें और सब परस्पर संगति में होकर प्रसन्न रहें, ऐसे उपाय पर विचार करें ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शक्ति-गति व ज्ञान

Word-Meaning: - [१] (सुहवा) = शोभन आह्वानवाले, जिनकी आराधना उत्तम है, उन (इन्द्रवायू) = इन्द्र और वायु को, शक्ति व गति के देवों को (इह) = इस जीवन में (हवामहे) = पुकारते हैं । (बृहस्पतिम्) = ज्ञान के अधिष्ठातृदेव को भी हम पुकारते हैं । हम 'शक्ति-गति व ज्ञान' की प्राप्ति के लिये प्रार्थना करते हैं । [२] हम यह चाहते हैं कि इस प्रकार का हमारा वातावरण बने कि (यथा) = जिससे (नः) = हमारे (सर्वः) = सब (इत्) = ही (जन:) = लोग (संगत्याम्) = सम्यक् गति के होने पर (सुमनाः) = उत्तम मनवाले (असत्) = हों ।
Connotation: - भावार्थ- हम शक्ति, गति व ज्ञान की आराधना करें। हमारे सभी व्यक्ति सम्यक् गतिवाले होते हुए उत्तम मनोंवाले हों ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सुहव-इन्द्रवायू) सुह्वानौ सभासेनेशौ “इन्द्रवायू राजसेनेशौ” [ऋ० ४।४६।७ दयानन्दः] (बृहस्पतिम्) बृहतां पालकं वैश्यम् “बृहतां पालको वैश्यः” [यजु० १४।१९ दयानन्दः] (हवामहे) आह्वयाम आमन्त्रयामहे (यथा नः-सर्वः-इत्-जनः) यथा हि खल्वस्माकं सर्वो जनसमूहः ‘समूहप्रत्ययस्य लोपश्छान्दसः’ (सङ्गत्यां सुमनाः-असत्) परस्परसङ्गतौ प्रसन्नमनाः भवेत् “अस भुवि” [अदादि०] लेटि-अडागमश्च ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We invoke, adore and pray for the cosmic energy of omnipotent Indra, Vayu, wind energy of cosmic Vayu, Brhaspati, cosmic sustenance of the infinite wielder of the universe, all worthies of love, invocation and adoration so that our people, noble and happy at heart, be united in cooperation for the peace and progress of life on the earth.