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य॒माय॒ सोमं॑ सुनुत य॒माय॑ जुहुता ह॒विः । य॒मं ह॑ य॒ज्ञो ग॑च्छत्य॒ग्निदू॑तो॒ अरं॑कृतः ॥

English Transliteration

yamāya somaṁ sunuta yamāya juhutā haviḥ | yamaṁ ha yajño gacchaty agnidūto araṁkṛtaḥ ||

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Pad Path

य॒माय॑ । सोम॑म् । सु॒नु॒त॒ । य॒माय॑ । जु॒हु॒त॒ । ह॒विः । य॒मम् । ह॒ । य॒ज्ञः । ग॒च्छ॒ति॒ । अ॒ग्निऽदू॑तः । अर॑म्ऽकृतः ॥ १०.१४.१३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:14» Mantra:13 | Ashtak:7» Adhyay:6» Varga:16» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:1» Mantra:13


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यमाय सोमं सुनुत) समय को अनुकूल बनाने के लिये ओषधिरस निकालना चाहिए, पुनः (यमाय हविः-जुहुत) उस ओषधिरस की हवि-आहुति अग्नि में होम करो (अग्निदूतः-अरङ्कृतः यज्ञः-यमं ह गच्छति) अग्निदूत के द्वारा यह सम्पादित यज्ञ काल को प्राप्त हो जाता है ॥१३॥
Connotation: - आयुर्वैदिक ढंग से ओषधिरस का होम जीवन को चिरकालीन बनाने का हेतु है ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यम की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] (यमाय) = उस सर्वनियन्ता प्रभु की प्राप्ति के लिये (सोमं सुनुत) = सोम का अपने में उत्पादन करो। प्रभु 'यम' हैं, मनुष्य भी 'यम'-संयमी बनकर ही उस प्रभु का सच्चा उपासक बन पाता है। यह संयमी पुरुष सोम का सम्पादन करनेवाला होता है । [२] (यमाय) = उस प्रभु की प्राप्ति के लिये (हविः जुहुता) = हवि के देनेवाले बनो । 'कस्मै देवाय हविषा विधेम ' -उस सुखस्वरूप देव का हवि के द्वारा ही तो हम पूजन करते हैं, यज्ञशेष का सेवन ही हवि का स्वीकार करना है। हम सदा पाँचों यज्ञों को करके यज्ञशेष को ग्रहण करें। [३] (यमम्) = उस सर्वनियन्ता प्रभु को (ह) = निश्चय से (यज्ञः) = ' देवपूजा-संगतिकरण व दान' इन धर्मों का पालन करनेवाला ही (गच्छति) = प्राप्त होता है । वह उस यम को प्राप्त होता है जो कि (अग्निदूतः) = उस अग्नि नामक प्रभु का दूत बनता है, संदेशवाहक बनता है। प्रभु से दिये गये ज्ञान को जो सर्वत्र प्रचारित करनेवाला होता है। और (अरंकृत:) = अपने जीवन को सद्गुणों से अलंकृत करता है, अपने जीवन को सद्गुणों से अलंकृत किये बिना वह औरों में ज्ञान का प्रचार कर भी तो नहीं सकता।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु प्राप्ति के लिये आवश्यक है कि - [क] हम सोम का सम्पादन करें, [ख] ज्ञान का प्रसार करनेवाले बनें, [ग] अपने जीवन को सद्गुणों से मण्डित करें।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यमाय सोमं सुनुत) आयुरूपाय जीवनकालाय विश्वकालाय च तत्सौष्ठ्यसम्पादनायेत्यर्थः, सोममोषधिरसं निःसारयत (यमाय हविः-जुहुत) यमाय पूर्वोक्ताय हविः होत्रं कुरुत (अग्निदूतः-अरङ्कृतः-यमः-यमं ह गच्छति) अग्निर्दूतो यस्य स एवमलङ्कृतः सम्यक् कृतो यज्ञः कालं गच्छति ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Prepare the soma for Yama, lord of the light and life of cosmic order, offer the homage of soma oblations to Yama, the holy soma-yajna goes to Yama, with all its beauty and power conducted by the holy fire, divine messenger between the devoted yajakas and the sun.