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उन्म॑दिता॒ मौने॑येन॒ वाताँ॒ आ त॑स्थिमा व॒यम् । शरी॒रेद॒स्माकं॑ यू॒यं मर्ता॑सो अ॒भि प॑श्यथ ॥

English Transliteration

unmaditā mauneyena vātām̐ ā tasthimā vayam | śarīred asmākaṁ yūyam martāso abhi paśyatha ||

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Pad Path

उत्ऽम॑दिता । मौने॑येन । वाता॑न् । आ । त॒स्थि॒म॒ । व॒यम् । शरी॑रा । इत् । अ॒स्माक॑म् । यू॒यम् । मर्ता॑सः । अ॒भि । प॒श्य॒थ॒ ॥ १०.१३६.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:136» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:24» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (मौनेयेन) मननीय सूर्य के द्वारा (उन्मदिताः) उत्कृष्ट हर्षित-प्रकाशित हुए (वयं वातान्-आ तस्थिम) गतिप्रद वायुओं-वातसूत्रों को आश्रित करके हम भलीभाँति ठहरे हुए हैं आकाश में (यूयं मर्त्तासः) हे ! तुम मनुष्यो ! (अस्माकं शरीराणि-इत्) हमारे बाहिरी शरीर आकार को ही (अभि पश्यथ) देखते हो, विशिष्ट नहीं जानते हो ॥३॥
Connotation: - आलङ्कारिक भाषा में आकाश के ग्रह बोलते हैं-मननीय सूर्य के द्वारा ग्रह प्रकाशित होते हैं, गतिप्रद वातसूत्रों के आश्रित आकाश में गति करते हैं, मनुष्य केवल उन बाहिरी रूप को देखते हैं, परन्तु अन्दर के स्वरूप को नहीं जानते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्राणाधिष्ठानता

Word-Meaning: - [१] 'मुनेर्भावः मौनेयम्' (मौनेयेन) = मौन साधना व मनन के द्वारा (उन्मदिताः) = उत्कृष्ट हर्ष को प्राप्त हुए हुए (वयम्) = हम (वातान्) = प्राणों के (आतस्थिम) = अधिष्ठाता बनते हैं । प्राणसाधना के द्वारा प्राणों को वश में करना ही प्राणों का अधिष्ठाता बनना है। प्राणों के अधिष्ठाता बनकर ये व्यक्ति निर्दोष बनते हुए देव बनकर प्रभु में प्रवेश करनेवाले होते हैं । [२] प्रभु कहते हैं कि हैं (मर्तासः) = सामान्य मनुष्यो ! तुम तो (अस्माकम्) = हमारे शरीरा (इत्) = इन शरीरों को ही (अभिपश्यथ) = देखते हो। तुम इन शरीरों से ऊपर नहीं उठ पाते । अन्नमयकोश तक ही तुम्हारी दौड़ रहती हैं, तुम प्राणमय में नहीं आ पाते। बस, अन्नमय से ऊपर उठेंगे तभी देववृत्ति का प्रारम्भ होगा। असुर लोग अन्नमय में ही रमे रह जाते हैं। वे इन शरीरों का ही पोषण करते-करते समाप्त हो जाते हैं । देव लोग शरीर को स्वस्थ रखते हुए आगे बढ़ते हैं, वे प्राणमयकोश को उत्तम बनाने का ध्यान करते हैं। इस प्राणसाधना से उनका मन निष्पाप बनता है, बुद्धि तीव्र होती है और वे प्रभु में प्रवेश करनेवाले बनते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- हम मर्त न बने रहकर देव बनें । प्राणों के अधिष्ठाता बनकर आगे बढ़ें।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (मौनेयेन) मननीयसूर्येण (उन्मदिताः) उत्कृष्टं हर्षिताः प्रकाशिताः (वयं वातान्-आ तस्थिम) वयं वायून्-आश्रित्य समन्तात् स्थिताः-ग्रहाः (यूयं मर्त्तासः) हे मनुष्या (अस्माकं शरीरा-इत्) अस्माकं शरीराणि हि बाह्याकारान् हि (अभि पश्यथ) अभिपश्यत न विशिष्टं जानीथ ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Inspired by the sun we, space objects, abide in orbital stability by the cosmic currents of universal energy. O mortals, you may see our body on the surface, but nothing inside.$(Pranic energies of the sage inspired by spiritual energy, we abide in balance with the psychic currents of the soul. O mortals, you can visualise and observe our physical movements, but the inner reality, you can’t.)