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अव॑ स्म दुर्हणाय॒तो मर्त॑स्य तनुहि स्थि॒रम् । अ॒ध॒स्प॒दं तमीं॑ कृधि॒ यो अ॒स्माँ आ॒दिदे॑शति दे॒वी जनि॑त्र्यजीजनद्भ॒द्रा जनि॑त्र्यजीजनत् ॥

English Transliteration

ava sma durhaṇāyato martasya tanuhi sthiram | adhaspadaṁ tam īṁ kṛdhi yo asmām̐ ādideśati devī janitry ajījanad bhadrā janitry ajījanat ||

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Pad Path

अव॑ । स्म॒ । दुः॒ऽह॒ना॒य॒तः । मर्त॑स्य । त॒नु॒हि॒ । स्थि॒रम् । अ॒धः॒ऽप॒दम् । तम् । ई॒म् । कृ॒धि॒ । यः । अ॒स्मान् । आ॒ऽदिदे॑शति । दे॒वी । जनि॑त्री । अ॒जी॒ज॒न॒त् । भ॒द्रा । जनि॑त्री । अ॒जी॒ज॒न॒त् ॥ १०.१३४.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:134» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:22» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (दुर्हणायतः) दुःख से हनन करते हुए (मर्तस्य) मनुष्य के (स्थिरम्-अव तनुहि) दृढ़बल को नीचे-कर (तम्-ईम्) उसको (अधस्पदं कृधि) पैरों के नीचे कुचल (यः-अस्मान्) जो हमें (आदिदेशति) हम पर शस्त्र फेंकता है, इसलिए (जनित्री देवी०) पूर्ववत् ॥२॥
Connotation: - दुःख देकर मारनेवाले मनुष्य के बल को नीचे करना चाहिए और उसे पैरों के नीचे कुचल देना चाहिए, जो शस्त्रास्त्रों से आक्रमण करता है॥२।

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शत्रु-शातन प्रभु

Word-Meaning: - [१] (दुर्हणायतः) = बुरी तरह से घातपात करनेवाले (मर्तस्य) = मनुष्य के (स्थिरम्) = स्थिर शक्ति को (अवतनुहि स्म) = निश्चय से तितर-बितर कर दीजिये । (तम्) = उस शत्रु को (ईम्) = निश्चय से (अधस्पदं कृधि) = पादाक्रान्त करिये (यः) = जो (अस्मान्) = हमें (आदिदेशति) = [जिघांसति] नष्ट करना चाहता है, हमें लक्ष्य करके घातक अस्त्रों का अतिसर्जन करता है । [२] इस प्रकार प्रभु आस्तिक व्यक्तियों का रक्षण करते हैं, और इन घातपात की वृत्तिवालों का विनाश करते हैं । यह देवी (जनित्री) = व्यवहार साधिका जन्मदात्री प्रकृति प्रभु की महिमा को (अजीजनत्) = प्रकट करती हैं । (भद्रा) = यह कल्याण व सुख को प्राप्त करानेवाली (जनित्री) = उत्पादक प्रकृति (अजीजनत्) = एक-एक पदार्थ में प्रभु की महिमा को व्यक्त कर रही है। 'सम्पूर्ण संसार में किस प्रकार अत्याचार करनेवाला स्वयं उन अत्याचारों का शिकार हो जाता है' यह देखकर उस प्रभु की महिमा विचित्र ही प्रतीत होती है।
Connotation: - भावार्थ - अत्याचारियों का विनाश प्रभु ही करते हैं ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (दुर्हणायतः-मर्तस्य स्थिरम्-अव-तनुहि) दुःखेन हननं कुर्वतो मनुष्यस्य दृढं बलमवतारय नीचीनं कुरु नाशय (तम्-ईम्-अधस्पदं कृधि) तं हि पादयोरधः कुरु नीचैर्निपातय (यः-अस्मान्-आदिदेशति) योऽस्मान् प्रति शस्त्रास्त्राणि प्रेरयति, एतदर्थमेव (जनित्री देवी०) पूर्ववत् ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Strike down the adamantine stubbornness of the mortal enemy who wickedly injures the law and order of the system. Crush him down to naught who suppresses us and enslaves us. The divine mother create you, the gracious mother elevates you in glory as the great ruler.