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कासी॑त्प्र॒मा प्र॑ति॒मा किं नि॒दान॒माज्यं॒ किमा॑सीत्परि॒धिः क आ॑सीत् । छन्द॒: किमा॑सी॒त्प्रउ॑गं॒ किमु॒क्थं यद्दे॒वा दे॒वमय॑जन्त॒ विश्वे॑ ॥

English Transliteration

kāsīt pramā pratimā kiṁ nidānam ājyaṁ kim āsīt paridhiḥ ka āsīt | chandaḥ kim āsīt praügaṁ kim ukthaṁ yad devā devam ayajanta viśve ||

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Pad Path

का । आ॒सी॒त् । प्र॒ऽमा । प्र॒ति॒ऽमा । किम् । नि॒ऽदान॑म् । आज्य॑म् । किम् । आ॒सी॒त् । प॒रि॒ऽधिः । कः । आ॒सी॒त् । छन्दः॑ । किम् । आ॒सी॒त् । प्रउ॑गम् । किम् । उ॒क्थम् । यत् । दे॒वाः । दे॒वम् । अय॑जन्त । विश्वे॑ ॥ १०.१३०.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:130» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:18» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (का) क्या (प्रमा) प्रमाणरीति (प्रतिमा) प्रतिकृति-रूपरेखा (आसीत्) थी-है (किं निदानम्) क्या हेतु-क्या लक्ष्य था-है (किम्-आज्यम्-आसीत्) क्या घृत दीप्ति का साधन था या है (कः परिधिः-आसीत्) क्या सब ओर से धारण करनेवाला घेरा था या है (छन्दः-किम्-आसीत्) क्या छन्द था या है (प्र उगम्-उक्थं किम्) क्या प्रउग उक्थ था या है (यत्-विश्वेदेवाः) जब सारे विद्वान् (देवम्-अयजन्त) इष्टदेव का यजन करते थे या करते हैं ॥३॥
Connotation: - उक्त ब्राह्मयज्ञ या शरीरयज्ञ की क्या प्रमारीति या रूपरेखा थी, क्या निदानहेतु या लक्ष्य था, क्या दीप्ति का साधन क्या परिधि या आवर्त्त था, छन्द कौन-प्रउग कौन-उक्थ कौन था, जबकि सारे देव इष्टदेव का यजन करते थे ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देवयज्ञ के स्वरूप की जिज्ञासा

Word-Meaning: - (यत्) = जब (विश्वे देवा:) = समस्त देवगण (देवम् अयजन्त) = परमेश्वर की पूजा करते हैं, उसका यज्ञ करते हैं, तब (का प्रमा आसीत्) = 'प्रमा' अर्थात् 'परिमाण' क्या रहा, और (प्रतिमा का आसीत्) = मापने का साधन क्या था ? किं निदानम् इष्ट ध्येय फल क्या था ? (आज्यम् किम् आसीत्) = यज्ञ में घृत के सदृश उस परम फल तक पहुँचने का साधन क्या था ? (परिधिः कः आसीत्) = यज्ञ में परिधि रूप तीन समिधाएँ रक्खी जाती हैं उसी प्रकार उस देव भाग में क्या परिधि थी और (छन्दः किम्) = गायत्री आदि छन्दवत् कौन - सा छन्द था ? (प्रउगम् उक्थम्) = यज्ञ में प्रउग आदि अर्थशंसिनी ऋचाओं के स्थान पर देवयाग में क्या पदार्थ था ?
Connotation: - भावार्थ- जब देव यज्ञ करते थे तो उस समय आज्य समिधा, मन्त्र, छन्द कौन - सा था ?

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (का प्रमा प्रतिमा-आसीत्) तस्मिन्निर्माणयज्ञे का प्रमितिः प्रमाणरीतिस्तथा प्रतिमा प्रतिकृतिः खल्वासीत्-भवति वा (किं निदानम्) किं हेतुभूतं वस्तुलक्ष्यं वा भवति (किम्-आज्यम्-आसीत्) किं घृतं दीप्तिसाधनं भवति (कः परिधिः-आसीत्) कः परितो-धारक आवर्तो वा भवति (छन्दः किम् आसीत्) छन्दः-किं भवति (प्र उगम्-उक्थं किम्) प्रउगम्-उक्थं किं भवति (यत्-विश्वेदेवाः-देवम्-अयजन्त) यदा सर्वे देवा विद्वांस इष्टदेवं यजनीयं यजन्ति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - What is the central vision and comprehensive blueprint of the design of cosmic yajna? What is the measure of the progressive stages of the yajna upto accomplishment? What is the basic cause and ultimate purpose? What is the ghrta input of the yajna? What is the ultimate bound? What is the chhanda, joyous formula, from the inception and conception to completion? What is the beginning, middle and the hymnal close of the divine yajna? When the divinities join the Supreme Divinity in the yajna of cosmic creation, what are these constituents of the creative process?