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को अ॒द्धा वे॑द॒ क इ॒ह प्र वो॑च॒त्कुत॒ आजा॑ता॒ कुत॑ इ॒यं विसृ॑ष्टिः । अ॒र्वाग्दे॒वा अ॒स्य वि॒सर्ज॑ने॒नाथा॒ को वे॑द॒ यत॑ आब॒भूव॑ ॥

English Transliteration

ko addhā veda ka iha pra vocat kuta ājātā kuta iyaṁ visṛṣṭiḥ | arvāg devā asya visarjanenāthā ko veda yata ābabhūva ||

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Pad Path

कः । अ॒द्धा । वे॒द॒ । कः । इ॒ह । प्र । वो॒च॒त् । कुतः॑ । आऽजा॑ता । कुतः॑ । इ॒यम् । विऽसृ॑ष्टिः । अ॒र्वाक् । दे॒वाः । अ॒स्य । वि॒ऽसर्ज॑नेन । अथ॑ । कः । वे॒द॒ । यतः॑ । आ॒ऽब॒भूव॑ ॥ १०.१२९.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:129» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:17» Mantra:6 | Mandal:10» Anuvak:11» Mantra:6


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (कः) कौन (अद्धा) तत्त्व से-यथार्थ (वेद) जाने (कः) कौन (इह) इस विषय में (प्र वोचत्) प्रवचन कर सके-कह सके (इयं विसृष्टिः) यह विविध सृष्टि (कुतः) किस निमित्तकारण से (कुतः-आजाता) किस उपादान से प्रकट हुई-उत्पन्न हुई (अस्य विसर्जनेन) इसके विसर्जन से उत्पादन से (अर्वाक्-देवाः) पीछे उत्पन्न हुए विद्वान् हैं (अथ कः) पुनः कौन (वेद) जान सके (यतः-आबभूव) जिस उपादान से ये आविर्भूत हुई-उत्पन्न हुई ॥६॥
Connotation: - यह विविध सृष्टि किस निमित्तकारण से और किस उपादानकारण से उत्पन्न होती है, इस बात को कोई बिरला विद्वान् ही यथार्थरूप में जान सकता है, क्योंकि सभी विद्वान् सृष्टि उत्पन्न होने के पश्चात् होते हैं-अर्थात् कोई तत्त्ववेत्ता योगी ही इसको समझ सकता है और कह सकता है ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

जगत् का मूल कारण अज्ञेय

Word-Meaning: - (अद्धा कः वेद) = ठीक-ठीक कौन जान सकता है ? (इह कः प्रवोचत्) = इस विषय में कौन उत्तम रीति से प्रवचन या उपदेश कर सकता है ? (कृतः आ जाता) = कि यह सृष्टि कहाँ से प्रकट हुई? (इयं विसृष्टि:) = यह विविध प्रकार का सर्ग (कुतः) = किस मूल कारण से और क्यों हुआ ? (देव:) = विद्वान् लोग भी (अस्य विसर्जनेन) = इस जगत् को विविध प्रकार से रचनेवाले मूलकारण के (अर्वाक्) = पश्चात् ही हुए हैं । (अथ कः वेद) = तो फिर कौन उस तत्त्व को जानता है (यतः) = जिससे यह (आ बभूव) = चारों ओर प्रकट हुआ ?
Connotation: - भावार्थ - जब कोई नहीं था तो उस समय की वास्तविक स्थिति को कौन बता सकता है।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (कः-अद्धा वेद) कस्तत्त्वतो जानीयात् (कः-इह प्र वोचत्) को ह्यस्मिन् विषये प्रकथयेत् (कुतः-इयं विसृष्टिः कुतः-आजाता) कुतो निमित्तकारणात् खल्वियं विविधा सृष्टिः कुत उपादानाच्च प्रादुर्भूता (अस्य विसर्जनेन-अर्वाक्-देवाः) अस्य जगतो विसर्जनात् ‘विसर्जनेन विभक्तिव्यत्ययेन तृतीया पञ्चमीस्थाने’ पश्चादुत्पन्ना विद्वांसः सन्ति (अथ कः-वेद यतः-आबभूव) पुनः को जानीयात्-यत उपादानात् सृष्टिराभूता प्रादुर्भूता ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Who for certain knows, who here would declare whence this universe has come, whence this variety has emerged? The visionary sages all come after the creation and diversity of it. Who of them would then know whence and why all this has come into existence? Only He, the creator, would know, only He can reveal and declare.