Viewed 486 times
निरु॒ स्वसा॑रमस्कृतो॒षसं॑ दे॒व्या॑य॒ती । अपेदु॑ हासते॒ तम॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
nir u svasāram askṛtoṣasaṁ devy āyatī | aped u hāsate tamaḥ ||
Pad Path
निः । ऊँ॒ इति॑ । स्वसा॑रम् । अ॒कृ॒त॒ । उ॒षस॑म् । दे॒वी । आ॒ऽय॒ती । अप॑ । इत् । ऊँ॒ इति॑ । हा॒स॒ते॒ । तमः॑ ॥ १०.१२७.३
Rigveda » Mandal:10» Sukta:127» Mantra:3
| Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:14» Mantra:3
| Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:3
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (देवी-आयती) रात्रि देवी आती हुई (उषसं स्वसारम्) रात्रि के पीछे आनेवाली उसकी सहयोगिनी उषा प्रभातवेला को (निर् अकृत) संस्कृत करती है-सुशोभित करती है (तमः-इत्-उ-अप हासते) अन्धकार भी हट जाता है उषाकाल में ॥३॥
Connotation: - रात्रि आती है तो उसके पीछे चलती हुई भगिनी जैसी उषा के आने पर रात्रि का अन्धकार भाग जाता है, उषा की शोभा रात्रि के आश्रय पर है ॥३॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
अन्धकार विनाश
Word-Meaning: - [१] यह (देवी) = हमारे स्वाप का हेतुभूत रात्री [ दिव् स्वप्ने] (आयती) = समन्तात् गति करती हुई, आगे और आगे बढ़ती हुई, (स्वसारं उषसम्) = अपनी बहिन के तुल्य उषा का लक्ष्य करके (उ) = निश्चय से (निः अस्कृत) = स्थान को खाली कर देती है। रात्रि समाप्त होती है और उषा आती है । [२] इस उषा के आने पर (इत् उ) = निश्चय से (तमः अवहासते) = अन्धकार विनष्ट हो जाता है। वस्तुतः जीवन में भ्रान्ति के कारण जो उत्साह का अभाव हो गया था, वह रात्रि में सोकर शक्ति प्राप्ति के द्वारा, फिर से प्राप्त हो जाता है । प्रातः हम उठते हैं और अपने में फिर से उस उत्साह का अनुभव करते हैं । यही अन्धकार विनाश का भाव है ।
Connotation: - भावार्थ - रात्रि धीमे-धीमे आगे बढ़ती हुई उषा के लिए स्थान खाली करती है, अन्धकार विनष्ट हो जाता है। इसी प्रकार हमारे जीवनों में अनुत्साह का अन्धकार समाप्त होता है और उत्साह का प्रकाश फिर से दीप्त हो उठता है ।
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (देवी-आयती) रात्रिर्देवी खल्वागच्छन्ती सती (उषसं स्वसारम्-निर्-अकृत) उषसं रात्रेः पश्चादागमनशीलामुषसं प्रभातवेलां निष्करोति-संस्करोति स्वाश्रये ह्युषसं सुशोभमानां करोति (तमः-इत्-उ-अप हासते) अन्धकारः खल्वपि-अपगच्छति दूरीभवति “ओहाङ्गतौ” लेट्लकारे सिप्; रात्रिरुषसं बलं प्रयच्छति प्रकाशनाय रात्रेरपरकाले ह्युषसः प्रशंसा भवति नान्यथा ॥३॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Coming and advancing, the night divine prepares the way for its sister dawn which then dispels the dark.
