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यः प्रा॑ण॒तो नि॑मिष॒तो म॑हि॒त्वैक॒ इद्राजा॒ जग॑तो ब॒भूव॑ । य ईशे॑ अ॒स्य द्वि॒पद॒श्चतु॑ष्पद॒: कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥

English Transliteration

yaḥ prāṇato nimiṣato mahitvaika id rājā jagato babhūva | ya īśe asya dvipadaś catuṣpadaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema ||

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Pad Path

यः । प्रा॒ण॒तः । नि॒ऽमि॒ष॒तः । म॒हि॒ऽत्वा । एकः॑ । इत् । राजा॑ । जग॑तः । ब॒भूव॑ । यः । ईशे॑ । अ॒स्य । द्वि॒ऽपदः॑ । चतुः॑ऽपदः । कस्मै॑ । दे॒वाय॑ । ह॒विषा॑ । वि॒धे॒म॒ ॥ १०.१२१.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:121» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:3» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:3


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (प्राणतः) प्राण लेते हुए (निमिषतः) शान्त चेष्टा करते हुए (जगतः) जगत् का (महित्वा) अपने महत्त्व से (एकः-इत्) अकेला ही (राजा बभूव) राजा है (यः) जो (अस्य) इस (द्विपदः) दो पैर वाले (चतुष्पदः) चार पैरवाले का (ईशे) स्वामी बना हुआ है (कस्मै ...) पूर्ववत् ॥३॥
Connotation: - परमात्मा स्थावर जङ्गम जगत् का तथा दो पैर और चार पैरवाले प्राणी का स्वामी है, उस सुखस्वरूप प्रजापति के लिये उपहाररूप से अपनी आत्मा को समर्पित करना चाहिये ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वह अद्वितीय 'ईश'

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो प्रभु (प्राणतः) = श्वासोच्छ्वास लेनेवाले प्राणियों तथा (निमिषतः) = आँखों की पलक सदा बन्द किये हुए वनस्पतियों, इस द्विविध (जगतः) = जगत् का (महित्वा) = अपनी महिमा के कारण (एकः इत्) = अकेले ही (राजा बभूव) = शासक हैं। प्रभु सम्पूर्ण चराचर जगत् का, स्थावरजंगम संसार का शासन कर रहे हैं । [२] (यः) = जो (अस्य) = इन (द्विपदः चतुष्पदः) = दो पाँवोंवाले पक्षियों के तथा चार पाँववाले पशुओं के (ईशे) = ईश हैं। इनके अन्दर उस-उस नैपुण्य को स्थापित करनेवाले हैं । मधुमक्षिकाओं को शहद के निर्माण का नैपुण्य प्रभु ही प्राप्त कराते हैं। चील का शान्त परों से उड़ना प्रभु की ही महिमा का द्योतक है। सिंह को अद्भुत तैरने का सामर्थ्य प्रभु ही प्राप्त कराते हैं। इस (कस्मै) = आनन्दस्वरूप (देवाय) = देव के लिए (हविषा) = दानपूर्वक अदन से (विधेम) = हम पूजा करें। इस पूजा के द्वारा हम भी उन्नतिपथ पर आगे बढ़ सकेंगे।
Connotation: - भावार्थ - चराचर जगत् के स्वामी प्रभु ने ही पशु-पक्षियों में अद्भुत नैपुण्यों को स्थापित किया है। उसका पूजन ही हमें भी जीवन मार्ग में उन्नत करता है ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) यः परमात्मा (प्राणतः-निमिषतः-जगतः) प्राणं गृह्णतोऽथ शान्तचेष्टां कुर्वतश्च जगतः संसारस्य (महित्वा) स्वमहत्त्वेन (एकः-इत्) एक एव (राजा बभूव) राजाऽस्ति (यः) यः खलु (अस्य द्विपदः-चतुष्पदः-ईशे) अस्य द्विपादवतश्चतुष्पादवतश्च प्राणिनः स्वामिनं करोति (कस्मै देवाय हविषा-विधेम) पूर्ववत् ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The sole one lord who, with his own might, creates and rules over the world of those who breathe and see, the lord who rules over both men and animals, to that sovereign lord of bliss and majesty we offer homage and worship with our heart and soul.