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स्तु॒षेय्यं॑ पुरु॒वर्प॑स॒मृभ्व॑मि॒नत॑ममा॒प्त्यमा॒प्त्याना॑म् । आ द॑र्षते॒ शव॑सा स॒प्त दानू॒न्प्र सा॑क्षते प्रति॒माना॑नि॒ भूरि॑ ॥

English Transliteration

stuṣeyyam puruvarpasam ṛbhvam inatamam āptyam āptyānām | ā darṣate śavasā sapta dānūn pra sākṣate pratimānāni bhūri ||

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Pad Path

स्तु॒षेय्य॑म् । पु॒रु॒ऽवर्प॑सम् । ऋभ्व॑म् । इ॒नऽत॑मम् । आ॒प्त्यम् । आ॒प्त्याना॑म् । आ । द॒र्ष॒ते॒ । शव॑सा । स॒प्त । दानू॑न् । प्र । सा॒क्ष॒ते॒ । प्र॒ति॒ऽमाना॑नि । भूरि॑ ॥ १०.१२०.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:120» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:6


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (आप्त्यानाम्) प्राप्तव्यों का भी (आप्त्यम्) प्राप्तव्य (स्तुषेय्यम्) स्तुति करने योग्य (पुरुवर्पसम्) बहुतगुणरूप (ऋभ्वम्) उरुभूत-महान् (इनतमम्) सर्वेश्वर परमात्मा को (शवसा) बल से (सप्त दानून्) सर्पणशील भोगप्रद इन्द्रियों को (आ दर्षते) बहिर्मुख करता है (भूरि प्रतिमानानि) बहुत विषय प्रमाणवाली (प्र साक्षते) भलीभाँति प्राप्त कराता है ॥६॥
Connotation: - सत्सङ्ग के लिये प्राप्तव्य विद्वानों का भी जो प्राप्तव्य, गुरुओं का गुरु, स्तुतियोग्य अनन्त गुणरूप सर्वेश्वर परमात्मा इन्द्रियों को बहिर्मुख खोलता है, जिनके लिये बहुत विषयों को प्राप्त कराता है, उपासनीय है ॥६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋषि आश्रय, नकि दानव - गृह

Word-Meaning: - [१] मैं उस इन्द्र का स्तवन करता हूँ जो (स्तुषेय्यम्) = [स्तोतव्यम्] स्तुति के योग्य हैं, (ऋभ्वम्) = [उरु भासमाने] खूब दीप्त हैं, (पुरुवर्पसप्) = नानारूपोंवाले हैं 'रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव' । (इनतमम्) = जो सर्वमहान् इश्वर हैं, (आप्त्यानां आप्त्यम्) = आप्त्यों में आप्त्य हैं, विश्वसनीयों में विश्वसनीय हैं। [२] स्तुति किये गये ये प्रभु (शवसा) = शक्ति के द्वारा (सप्त दानून्) = सप्त ऋषियों के विपरीत सप्त दानवृत्तियों को (आदर्षते) = विदीर्ण करते हैं । और (प्रतिमानानि) = इनके प्रत्येक निवास स्थान को (भूरि प्रसाक्षते) = खूब ही विनष्ट करते हैं । [प्रतिमानानि = असुराणां स्थानानि] । [३] 'सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीर' शरीर में सात ऋषियों की स्थापना हुई है। ये सात उत्तम भावनाएँ विकृत होती हैं, तो ये सात दानव बन जाते हैं। प्रभु इन दानवों के किलों का विनाश करते हैं हमारा जीवन प्रभु कृपा से विषयास्वाद् [लक् आस्वादने] से ऊपर उठकर फिर से अजेय हो जाता है, हमें वासनाएँ पराजित नहीं कर पाती ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु स्मरण से हमारा जीवन दानव-गृह नहीं, अपितु ऋषियों का आश्रय बनता है ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (आप्त्यानाम् आप्त्यम्) प्राप्तव्यानामपि प्राप्तव्यं (स्तुषेय्यम्) स्तोतव्यम् “स्तु धातोः” स्तुवः वसेय्यश्छान्दसः [उणा० ३।९६] (पुरुवर्पसम्) बहुगुणरूपम् (ऋभ्वम्) उरुभूतं महान्तम् (इनतमम्) ईश्वरतमं सर्वेश्वरं परमात्मानं (शवसा) बलेन (सप्त दानून्) सर्पणशीलान् दातॄन् भोगप्रदान्-इन्द्रियप्राणान् (आ दर्षते) आदृणाति  छिनत्ति बहिर्मुखानि करोति, तथा (भूरि प्रतिमानानि प्र साक्षते) प्रतिविषयप्रमाणानि समन्तात् प्रापयति “साक्षतिराप्नोतिकर्मा” [निरु० ११।२३।६] ॥६॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We love and celebrate Indra in song, lord adorable infinite in form, all pervasive, most glorious and wisest of the self-realised wise. With his might he breaks seven types of clouds and seven orders of sin and evil, and he challenges and subdues the many adversaries that arise in the world of nature and humanity.