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उन्मा॑ पी॒ता अ॑यंसत॒ रथ॒मश्वा॑ इवा॒शव॑: । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥

English Transliteration

un mā pītā ayaṁsata ratham aśvā ivāśavaḥ | kuvit somasyāpām iti ||

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Pad Path

उत् । मा॒ । पी॒ताः । अ॒यं॒स॒त॒ । रथ॑म् । अश्वाः॑ऽइव । आ॒शवः॑ । कु॒वित् । सोम॑स्य । अपा॑म् । इति॑ ॥ १०.११९.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:119» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:6» Varga:26» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पीताः) परमात्मा के आनन्दरस पिये हुए (मा) मुझे (उत्-अयंसत) ऊँचे ले जाते हैं-उन्नत करते हैं (आशवः) शीघ्रगामी (अश्वाः-इव) घोड़े जैसे (रथम्) रथ को उड़ा ले जाते हैं (कुवित् सोमस्य अपाम् इति) क्योंकि मैंने परमात्मा के आनन्दरस का बहुत पान किया ॥३॥
Connotation: - परमात्मा के आनन्दरस का बहुत पान करनेवाले उपासक आत्मा को ऐसे ऊपर ले जाते हैं, जैसे शीघ्रगामी घोड़े रथ को उड़ाये ले जाते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

उन्नति के मार्ग पर

Word-Meaning: - [१] (कुवित्) = खूब ही (सोमस्य) = सोम का (अपाम्) = मैंने पान किया है (इति) = इस कारण (पीताः) = ये शरीर में ही व्याप्त किये हुए [= पिये हुए] सोम (मा) = मुझे, (आशवः) = शीघ्रगामी (अश्वाः) = घोड़े (रथं इव) = जिस प्रकार रथ को तीव्र गति से ले चलते हैं, उसी प्रकार (उत् अयंसत) = उन्नति के मार्ग पर ले चलते हैं । [२] सोम के पान से, वीर्यरक्षण से मनुष्य उन्नति के मार्ग पर इस प्रकार आगे बढ़ता है जैसे कि तीव्रगामी अश्व रथ को लेकर आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ता हुआ यह मनुष्य अधिक और अधिक उन्नत होता चलता है उन्नति का मार्ग सोमरक्षणामूलक ही है। मैं सोम का रक्षण करता हूँ। रक्षित सोम मुझे उन्नत करता है ।
Connotation: - भावार्थ - उन्नति के मार्ग का आक्रमण सोमरक्षण पर ही निर्भर करता है।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पीताः-मा-उत्-अयंसत) पीताः-परमात्मानन्दरसाः-मामुन्नयन्ति (आशवः-अश्वाः-रथम्-इव) यथा-आशुगामिनोऽश्वा रथमुन्नयन्ति (कुवित् सोमस्य अपाम् इति) पूर्ववत् ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The draughts of divine soma have raised me up in ecstasy of body, mind and spirit like swift horses carrying the chariot and the master, for I have drunk of the soma of the divine spirit.