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अ॒स्य पि॑ब क्षु॒मत॒: प्रस्थि॑त॒स्येन्द्र॒ सोम॑स्य॒ वर॒मा सु॒तस्य॑ । स्व॒स्ति॒दा मन॑सा मादयस्वार्वाची॒नो रे॒वते॒ सौभ॑गाय ॥

English Transliteration

asya piba kṣumataḥ prasthitasyendra somasya varam ā sutasya | svastidā manasā mādayasvārvācīno revate saubhagāya ||

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Pad Path

अ॒स्य । पि॒ब॒ । क्षु॒ऽमतः॑ । प्रऽस्थि॑तस्य । इन्द्र॑ । सोम॑स्य । वर॑म् । आ । सु॒तस्य॑ । स्व॒स्ति॒ऽदाः । मन॑सा । मा॒द॒य॒स्व॒ । अ॒र्वा॒ची॒नः । रे॒वते॑ । सौभ॑गाय ॥ १०.११६.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:116» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:6» Varga:20» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् या आत्मन् ! (अस्य प्रस्थितस्य) इस समर्पित निष्पन्न (क्षुमतः सोमस्य) प्रशस्त अन्न सोमरस के (वरम्) वरणीय रस को (आ पिब) भलीभाँति पी या ग्रहण कर (स्वस्तिदाः) कल्याण देनेवाले (अर्वाचीनः) सामने प्राप्त हुआ है (रेवते सौभगाय) पुष्टिवाले सौभाग्य के लिये (मनसा) मन से (मादयस्व) तृप्त हो ॥२॥
Connotation: - राजा या आत्मा प्रशस्त प्राप्त सोमरस, जो कल्याणदायक है, उसका पान करे, सुरापान नहीं करे, ये सौभाग्य के लिये और पुष्टि के लिये है तथा मानसिक तृप्ति के लिये है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोमपान से 'समृद्धि व सौभाग्य'

Word-Meaning: - [१] (अस्य) = इस (क्षुमत:) = [क्षु = food] हविरूप अन्नवाले, अर्थात् जिसका उत्पादन दानपूर्वक अदन से ही हुआ है [ हु दानाद नयोः], उस (प्रस्थितस्य) = शरीर में विशेषरूप से स्थित सोमस्य सोम का, वीर्यशक्ति का हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (पिब) = तू पान कर। (आ सुतस्य) = जो सोम सब ओर उत्पन्न किया जाता है उस सोम के (वरम्) = वरणीय भाग को तू पीनेवाला बन। यह सोम तो सचमुच वरणीय ही वरणीय है । [२] इस सोम को शरीर में ही व्याप्त करने से (स्वस्तिदा:) = यह कल्याण का देनेवाला होता है। इसका पान करके तू (मनसा मादयस्व) = मन से आनन्द का अनुभव कर । सोमरक्षण से जीवन उल्लासमय बनता है । (अर्वाचीनः) = [अर्वाङ् अञ्चति] शरीर के अन्दर ही गति करनेवाला यह सोम (रेवते) = ऐश्वर्यौवाले (सौभगाय) = सौभाग्य के लिए होता है। अर्थात् सोमरक्षण मनुष्य को ऐश्वर्य प्राप्ति के योग्य तथा सौभाग्यशाली बनाता है, इस सोमपान करनेवाले का जीवन [place, planty of prospeity] समृद्धि व सौभाग्यवाला होता है।
Connotation: - भावार्थ- हम सोम का रक्षण करें। यह हमें कल्याण को प्राप्त करायेगा और हमारे जीवन की समृद्धि, सौभाग्य-सम्पन्न बनाएगा ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे राजन् ! आत्मन् ! वा (अस्य क्षुमतः-प्रस्थितस्य सोमस्य) अस्य प्रशस्तान्नस्य “क्षुमत्-अन्ननाम” [निघ० २।७] समर्पितस्य निष्पन्नस्य सोमस्यौषधिभूतस्य (वरम्-आ पिब) वरणीयं रसं पिब गृहाण वा (स्वस्तिदा-अर्वाचीनः) कल्याणदाता-अस्मदभिमुखः सन् (रेवते सौभगाय) पुष्टिमते “रयिः पुष्टिः” [जै० १।२४] सौभाग्याय (मनसा-मादयस्व) मनसा तृप्तो भव “मद तृप्तियोगे” [चुरादि०] ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, taste the best of beauty and sweetness of this abundant and powerful soma of the social and spiritual system prepared and seasoned to purity and sanctity of the highest order and presented in full faith. O giver of good and all round welfare of life, come straight to our vedi for the gift of wealth, honour and excellence of prosperity, happy at heart, and let us all rejoice.