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नाहं तं वे॑द॒ दभ्यं॒ दभ॒त्स यस्ये॒दं दू॒तीरस॑रं परा॒कात् । न तं गू॑हन्ति स्र॒वतो॑ गभी॒रा ह॒ता इन्द्रे॑ण पणयः शयध्वे ॥

English Transliteration

nāhaṁ taṁ veda dabhyaṁ dabhat sa yasyedaṁ dūtīr asaram parākāt | na taṁ gūhanti sravato gabhīrā hatā indreṇa paṇayaḥ śayadhve ||

Pad Path

न । अ॒हम् । तम् । वे॒द॒ । दभ्य॑म् । दभ॑त् । सः । यस्य॑ । इ॒दम् । दू॒तीः । अस॑रम् । प॒रा॒कात् । न । तम् । गू॒ह॒न्ति॒ । स्र॒वतः॑ । ग॒भी॒राः । ह॒ताः । इन्द्रे॑ण । प॒ण॒यः॒ । श॒य॒ध्वे॒ ॥ १०.१०८.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:108» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:6» Varga:5» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:9» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अहं तम्) मैं उस (दभ्यं न वेद) दम्भक प्रहारक शस्त्र को नहीं जानती हूँ (सः-दभत्) जिसे वह प्रहरित करता है-फेंकता है (यस्य दूतीः) जिसकी दूती-प्रेमिका बनी हुई (पराकात्) दूर से (इदम्-असरम्) इस स्थान को प्राप्त होती हूँ (तं न गूहन्ति) उस इन्द्र को गुप्त नहीं कर सकते, बन्धन में नहीं डाल सकते (इन्द्रेण हताः) उस विद्युद्देव से ताड़ित हुए (गभीराः पणयः) गम्भीर वणिजों की भाँति जलधन से पूर्ण मेघ (स्रवतः शयध्वे) जल स्रवण करते हुए-बहाते हुए धराशायी हो जाते हो ॥४॥ आध्यात्मिकयोजना−मैं चेतनशक्ति उस प्रहार को नहीं जानती हूँ जिसको वह फैंकता है, दूर से उसकी दूती इस स्थान को मोक्षधाम से प्राप्त हुई हूँ। उस इन्द्र को कोई आवृत नहीं कर सकते हैं, तुम विषयों में गहरे गये हुए इन्द्रिय प्राणों उससे धकेले हुए-शरीर में पड़े हुए हो ॥४॥
Connotation: - विद्युत् में इतनी शक्ति है कि उसकी ताड़ना से जल भरे मेघ जल बरसाते हुए लीन हो जाते हैं ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अहिंस्य 'हिंसक'

Word-Meaning: - [१] बुद्धि कहती है कि (अहम्) = मैं (तम्) = उस प्रभु को (दभ्यं न वेद) = हिंसनीय व दबाये जाने योग्य (न वेद) = नहीं जानती। उस प्रभु को प्रबल से प्रबल असुरभाव रूप शत्रु भी नष्ट नहीं कर सकता । (सः दभत्) = वे प्रभु इन सब असुरों का संहार करते हैं । वे प्रभु, (यस्य) = जिनकी कि (दूती:) = सन्देशवाहिका मैं (पराकात्) = सुदूर देश से (इदम्) = यहाँ तुम्हारे स्थान पर (असरम्) = जाती हूँ । [२] (तम्) = उस प्रभु को (स्रवतः) = बहते हुए (गभीराः) = अत्यन्त गहरे ये सांसारिक विषयों के जल (न गूहन्ति) = आवृत नहीं कर पाते। इन विषयों का आक्रमण अल्पज्ञ जीव पर ही होता है, उस सर्वज्ञ प्रभु को ये विषय आच्छादित नहीं कर पाते । [३] हे (पणयः) = व्यवहारी पुरुषो! तुम तो (इन्द्रेण हताः) = उस प्रभु से नष्ट हुए हुए, अर्थात् प्रभु की कृपा को न प्राप्त हुए हुए (शयध्वे) = सो रहे हो। तुम्हें अपने हिताहित का ध्यान नहीं । प्रभु कृपा होने पर ही तुम जागोगे और वास्तविक कल्याण को प्राप्त करने के लिए यत्नशील होवोगे ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु अहिंस्य हैं। वे ही वासनाओं का हिंसन करते हैं ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अहं तं दभ्यं न वेद सः-दभत्) अहं तं दम्भकं प्रहारं न जानामि यं स प्रहरति-प्रक्षिपति (यस्य-इदं दूतीः-पराकात्-असरम्) यस्य दूती सती दूरात् खल्विदं स्थानं प्राप्ताऽस्मि (तं न गूहन्ति) तमिन्द्रं न गुप्तं कुर्वन्ति (इन्द्रेण हताः) इन्द्रेण ताडिताः (गभीराः पणयः) गम्भीरा वणिज इव जलधनपूर्णा मेघाः (स्रवतः) जलस्रवणमाचरन्तः (शयध्वे) यूयं धराशया भवथ ॥४॥ आध्यात्मिकयोजना−अहं चेतना तं प्रहारं न जानामि यं स प्रहरति प्रक्षिपति-दूरात् तस्य दूतीदं स्थानं मोक्षधामतः प्राप्ताऽस्मि तमिन्द्रं गुप्तं न कुर्वन्ति गम्भीररूपेण यूयं संहताः शरीरे शेध्वे स्थिता भवत ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Sarama: O Panis, O clouds, O senses and pranic powers of practical living, I do not comprehend that power, Indra, which is undaunted, which is overpowering, whose messenger I am, come from afar. Mighty rolling oceans of unfathomable depth cannot cover it, nor contain it. Indeed, struck by Indra, the clouds fall in showers and lie on the ground.