Word-Meaning: - [१] (यः) = जो (सुहनाय) = [सुष्ठु हननीयाय] खूब ही हनन के योग्य (दस्यवे) = [दसु उपक्षये] नाश करनेवाली काम-क्रोधादि वृत्तियों के लिए, इन वृत्तियों को दूर करने के लिए, (वज्रम्) = [वज गतौ] क्रियाशीलतारूप वज्र को चक्रे करता है । क्रियाशीलता के द्वारा इन अशुभ वृत्तियों को अपने से दूर रखता है। वह (हिरीमश:) = [हिरीमनि शेते] तेजस्विता व कान्ति में निवास करनेवाला होता है । (हिरीमान्) = वेगवाला होता है। वासनाओं के विनष्ट होने पर ज्ञानेन्द्रियाँ चमक उठती हैं और यह ज्ञान की दीप्ति के कारण तेजस्वी व कान्त प्रतीत होता है। कर्मेन्द्रियों के शुद्ध होने पर यह वेगवाला होता है। [२] (अरुतहनुः) = [रुत= disease] नीरोग हनुवाला यह होता है, इसके (हनु) = [= जबड़े] इस प्रकार मात्रा में भोजन करते हैं कि रोग का वहाँ प्रश्न ही नहीं पैदा होता । (न च) = और इसका (रजः) = रजोगुण (अद्भुतम्) = अद्भुत होता है। सत्त्वगुण के सम्मिश्रण के कारण इसका रजोगुण इसके अपकर्म का कारण नहीं होता। रजोगुण इसमें क्रियाशीलता को पैदा करता है, पर इसके जीवन को वासनामय नहीं बनाता।
Connotation: - भावार्थ- क्रियाशील पुरुष क्रियाशीलतारूप वज्र के द्वारा वासनाओं को विनष्ट करके ज्योतिर्मय व वेगवाला होता है।