Go To Mantra
Viewed 461 times

बृह॑स्पते॒ परि॑ दीया॒ रथे॑न रक्षो॒हामित्राँ॑ अप॒बाध॑मानः । प्र॒भ॒ञ्जन्त्सेना॑: प्रमृ॒णो यु॒धा जय॑न्न॒स्माक॑मेध्यवि॒ता रथा॑नाम् ॥

English Transliteration

bṛhaspate pari dīyā rathena rakṣohāmitrām̐ apabādhamānaḥ | prabhañjan senāḥ pramṛṇo yudhā jayann asmākam edhy avitā rathānām ||

Pad Path

बृह॑स्पते । परि॑ । दी॒य॒ । रथे॑न । र॒क्षः॒ऽहा । अ॒मित्रा॑न् । अ॒प॒ऽबाध॑मानः । प्र॒ऽभ॒ञ्जन् । सेनाः॑ । प्र॒ऽमृ॒णः । यु॒धा । जय॑न् । अ॒स्माक॑म् । ए॒धि॒ । अ॒वि॒ता । रथा॑नाम् ॥ १०.१०३.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:103» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:5» Varga:22» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:9» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (बृहस्पते) हे बड़ी सेना के स्वामी ! (रथेन परि दीय) तू रथ से-यान से सर्वत्र जा (रक्षोहा) राक्षसों का दुष्टों का हनन करनेवाला (अमित्रान्)  शत्रुओं को (अपबाधमानः) पीड़ित करता हुआ (प्रमृणः) प्रकृष्टरूप से नाशक होता हुआ (सेनाः प्रभञ्जन्) शत्रुसेनाओं को रौंदता हुआ (युधा जयन्) युद्ध से-युद्ध करके जीतता हुआ (अस्माकम्) हमारे (रथानाम्) रथों का (अविता) रक्षक (एधि) हो ॥४॥
Connotation: - राजा को चाहिये कि भारी सेना को रखे, यान से राष्ट्र में सर्वत्र भ्रमण करे, दुष्टों का नाश करे, शत्रुओं का पीडन करे, शत्रुसेनाओं का मर्दन करते हुए युद्ध द्वारा जीतते हुए प्रजा के रथों-रमणसाधनों की रक्षा करे ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञानी बनो

Word-Meaning: - प्रभु जीव से कहते हैं (बृहस्पते) = हे ज्ञान के स्वामिन्! तू (रथेन) = इस शरीररूप रथ के द्वारा (परिदीया) = चमकनेवाला बन [ दी = to shine ] और आकाश में उड़नेवाला बन, अर्थात् उन्नति की ओर चल । जीव ने उन्नत होने के लिए ज्ञानी बनना है, बिना ज्ञान के किसी भी प्रकार की उन्नति सम्भव नहीं । यह बृहस्पति उन्नति करते-करते ऊर्ध्वादिक् का अधिपति बनता है। यह अपने शरीररूप रथ के द्वारा ऊर्ध्वगति करनेवाला बनता है [ दी = to soar ]। यह उन्नति की ओर चलता हुआ 'रक्षोहा' - रमण के द्वारा [र] क्षय [क्ष] करनेवाली वृत्तियों का संहार करता है । इनका संहार करके ही यह अपनी ऊर्ध्वगति को स्थिर रख पाएगा। यह अपनी यात्रा में आगे बढ़ता है- (अमित्रान्) = द्वेष की भावनाओं को (अपबाधमानः) = दूर करता हुआ। ईर्ष्या-द्वेष से मन मृत हो जाता है - मन के मृत हो जाने पर उन्नति सम्भव कहाँ ? हे बृहस्पते ! तू (सेना:) = इन वासनाओं के सैन्य को (प्रभञ्जन्) = प्रकर्षेण पराजित करता हुआ [रणे भङ्गः पराजयः] (प्रमृण:) = कुचल डाल । इस प्रकार (युधा) = इन वासनाओं के साथ युद्ध के द्वारा (जयन्) = विजयी बनता हुआ तू (अस्माकम्) = हमारे दिये हुए इन (रथानाम्) = रथों का (अविता) = रक्षक (एधि) = हो । इस रथ को तू इन राक्षसों, अमित्रों और वासना-सैन्यों का शिकार न होने दे। इसी प्रकार तू इस रथ के द्वारा 'ऊर्ध्वा दिक्' का अधिपति 'बृहस्पति' बन सकेगा ।
Connotation: - भावार्थ - हम ज्ञानी बनकर इस रथ से यात्रा को ठीक रूप में पूर्ण करनेवाले बनें ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (बृहस्पते) हे बृहत्याः सेनायाः पालकः ! “बृहस्पतिः-बृहत्याः सेनायाः पालकः” [यजु० १७।४८ दयानन्दः] (रथेन परि दीय) रथेन परितो गच्छ “दीयति-गतिकर्मा” [निघ० २।१४] (रक्षोहा) राक्षसाणां दुष्टानां हन्ता (अमित्रान्-अपबाधमानः) शत्रून्-अपपीडयन् (प्रमृणः-सेनाः प्रभञ्जन्) प्रकर्षेण नाशकः सन् शत्रुसेनाः प्रकर्षेण मृद्नन् (युधा जयन्) युद्धेन युद्धं कृत्वा जयं कुर्वन् (अस्माकं रथानाम्-अविता-एधि) अस्माकं रथानां रक्षको भव ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Fly by the chariot, Brhaspati, destroyer of demons, repeller of enemies, breaking through and routing their forces. Fighting and conquering by battle, come, defend and save our chariots of the social order.